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कट्टरपंथियों से कम नहीं भारतीय सरकार

कोलकाता: विवादित बांग्लादेशी लेखिका तसलीमा नसरीन बुधवार को भारत छोड़कर किसी अज्ञात स्थल की ओर रवाना हो र्गई। उनके फ्रांस या स्वीडन जाने की संभावना है और वे लंदन के हीथ्रो एयरपोर्ट से फ्लाइट लेंगी। उन्होंने भारत सरकार को जमकर कोसते हुए कहा है कि उसका रवैया ‘धार्मिक कट्टरपंथियों’ से कुछ कम नहीं है।

तसलीमा (46) दिल्ली से सुबह ब्रिटिश एयरवेज की फ्लाइट से रवाना हरुई, लेकिन उन्होंने यह नहीं बताया कि वे कहां जा रही हैं। उन्होंने कहा कि वे अपनी सुरक्षा के साथ कोई ‘समझौता’ नहीं करना चाहतीं। गौरतलब है कि तसलीमा के वीजा की अवधि पिछले महीने ही छह माह के लिए बढ़ाई गई थी।

मानवाधिकारों का हनन :

तसलीमा ने आरोप लगाया कि चार माह पहले कोलकाता से निकाले जाने के बाद जब उन्हें दिल्ली लाया गया था तभी से उनके मानवाधिकारों का हनन किया जा रहा था। उन्होंने कहा कि उन्हें आगामी कुछ महीनों में यूरोप में होने वाली अंतरराष्ट्रीय बैठकों में अपने दिल दहलाने वाले अनुभवों को बताने में कोई संकोच नहीं होगा।

टार्चर चैंबर :

उन्होंने कहा, ‘मैं बहुत ज्यादा तनाव में थी, लेकिन जुबान नहीं खोल सकती थी क्योंकि मैं उनकी (सरकार की) निगरानी में थी और उन्हें कष्ट नहीं देना चाहती थी।’ उन्होंने सरकार द्वारा दिल्ली में उपलब्ध कराए घर को ‘टॉर्चर चैंबर’ करार दिया।

ड्रग पॉइजनिंग :

तसलीमा ने दावा किया कि जब वे अस्वस्थ हरुई तो सरकार द्वारा चुने गए एक डॉक्टर की सलाह पर उन्होंने दवा लेनी शुरू कीं, लेकिन इससे ‘ड्रग पॉइजनिंग’ शुरू हो गई। उन्होंने कहा, ‘मैं बेहोश हो गई और मुझे सरकारी अस्पताल में भरती किया गया, जहां जीवन रक्षक दवाओं ने मेरी जान बचाई।’

बेअसर गुहार :

तस्लीमा ने कहा कि उन्होंने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और माकपा सुप्रीमो ज्योति बसु को पत्र लिखकर गुहार लगाई थी कि उन्हें कोलकाता में रहने की इजाजत दी जाए, लेकिन उन्हें कोई जवाब नहीं मिला।





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