लीडरशिप मंत्र. यह बात कुछ माह पहले की है। मेरे एक दोस्त को अपनी टीम के कुछ सदस्यों पर रत्ती भर भी विश्वास नहीं था। इस कारण वह उन्हें टीम की गतिविधियों से अलग रखता था। मुझसे कहता था कि वे प्रभावी ढंग से काम करने में सक्षम नहीं हैं। मुझे आश्चर्य इस बात का ज्यादा हुआ कि उसने कभी भी उन्हें अपनी प्रतिभा को साबित करने का मौका नहीं दिया। बात करने पर उसने खुलासा किया कि वह उन टीम मैंबरों की कम्युनिकेशन स्किल्स से बिलकुल प्रभावित नहीं था और इसीलिए उन्हें काम सौंप किसी तरह का खतरा उठाने को तैयार नहीं था।
इस घटना के आधार पर किसी भी शख्स को इस निगाह से देखिए कि वह क्या कर सकता है। वह जो है उसको उस निगाह से कतई मत देखें। उसकी विद्यमान क्षमताओं के आधार पर कोई निष्कर्ष नहीं निकालें। इसकी बजाय आप उसमें सीखने की ललक, सकारात्मक रवैया और नजरिया सरीखे गुण देख सकते हैं। उसका मस्तिष्क ग्राही है या वह खतरे उठाने के लिए तैयार है भी जरूरी गुण हैं। सबसे बड़ी बात उसमें काम के प्रति जुनून कितना है। साथ ही इस बात का भी भरसक ध्यान रखें कि वह आपके साथ-साथ आगे बढ़े। वह चीजों को जैसे करता है, वैसे ही उसकी सराहना करें। भले ही काम कितना भी छोटा क्यों न हो, उसकी सराहना करें।
इस बाबत हमेशा ध्यान रखें
१.पूर्वाग्रह से ग्रस्त हो कोई निष्कर्ष न निकालें।
२.सुनिश्चित करें कि आपके पास अपनी टीम के प्रत्येक सदस्य के लिए एक विकास मार्ग की अवधारणा तैयार है। उनका विकास व्यक्तिगत और व्यावसायिक दोनों स्तर पर होना चाहिए।
३.अहं को आड़े न आने दें।
लेखक नेतृत्व प्रशिक्षण संस्था लीडकैप के संस्थापक हैं।