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कैम्पस के नाम पर धोखे का शिकार हुए छात्र

भोपाल. निजी तकनीकी कालेजों द्वारा नौकरी दिलवाने के लिए करवाई जा रही कैम्पस चयन की प्रक्रिया भी अब पूरी तरह सुरक्षित नहीं रह गई है। शहर के एक निजी तकनीकी कालेज में कैम्पस चयन के नाम पर छात्रों के साथ धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। चयन करने वाली कंपनी के द्वारा छात्रों से पैसा वसूलने के बाद कंपनी के गायब हो जाने की शिकायत मानव अधिकार आयोग में की गई है। आयोग ने मामले को जांच के लिए तकनीकी शिक्षा संचालनालय को सौंपा है।

अगर आपके बच्चे का किसी कंपनी में चयन हुआ है तो बजाए खुश होने के पहले उक्त कंपनी की पूरी जांच पड़ताल करवा लें, अन्यथा किसी धोखे का शिकार हो सकते हैं। मानव अधिकार आयोग में सागर इंस्टीट्यूट आफ साइंस एंड टेक्नालाजी की एक छात्रा ने ऐसी ही एक कंपनी द्वारा धोखाधड़ी करने की शिकायत की है। छात्रा ने शिकायत में 29 छात्रों को कंपनी द्वारा ठगे जाने का जिक्र किया है। आयोग से शिकायत आने के बाद संचालनालय मामले की जांच करवा रहा है। इसके लिए संचालनालय के ही एक अधिकारी को जिम्मेदारी दी गई है। इन दिनो तकनीकी कालेजों में आए दिन कई कंपनियों में नौकरी के लिए कैम्पस चयन की प्रक्रियाएं करवाई जा रही हैं।

क्या था मामला

छात्रा ने आयोग को की शिकायत में बताया है कि जून 2007 में कालेज में आई एक कंपनी लाइफ बिजनेस प्रोजेक्ट ने कैम्पस चयन में कंप्यूटर साइंस के 29 विद्यार्थियों का ढाई लाख रू सालाना के पैकेज पर चयन किया। कंपनी ने सभी छात्रों को नियुक्ति पत्र भी दे दिया और प्रशिक्षण के लिए 75 हजार रू की सुरक्षा राशि जमा कराने को कहा। कुछ विद्याथिर्यों ने कंपनी के नाम पर यह राशि फिक्स्ड डिपाजिट में जमा करवा दी। राशि जमा करवाने वाले छात्रों को इंदौर में ढाई महीने प्रशिक्षण भी दिया गया। प्रशिक्षण के बाद ज्वाइन करने के लिए दी गई तिथि पर छात्र कंपनी के पते पर पहुंचे तो वहां ताला लगा मिला। शिकायत में कहा गया है कि बताए गए मुंबई के पते पर कंपनी का नामोनिशान भी नहीं था।





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