भोपाल. राज्य में प्राइमरी स्कूल तक के विद्यार्थियों को न तो होमवर्क करने का टेंशन रहेगा और न ही उनके अभिभावकों को बच्चों के पास होने की चिंता। इसके लिए स्कूलों में एक्टिविटी बेस्ड लर्निग (एबीएल) अपनाई जाएगी। ताकि बच्चों को उनके लिए लाभकारी व्यावहारिक ज्ञान खेल-खेल में दिया जा सके।
उक्त व्यवस्था तमिलनाडु में सफलतापूर्वक लागू है। मप्र में इसे लागू करने के लिए 70 शिक्षकों का एक दल इस महीने की 24 तारीख को वहां जा रहा है। राज्य शिक्षा केंद्र ने एबीएल का प्रस्ताव भी तैयार कर लिया है और इसे प्रदेश के कुछ चुनिंदा स्कूल में प्रायोगिक तौर पर अपनाने की तैयारी चल रही है।
क्या है एबीएल
एक्टिविटी बेस्ड र्ल्िनग में बच्चों को ऐसी शिक्षा दी जाती है जो उनका समग्र विकास करे। पहली से पांचवीं तक के बच्चों को खेल-खेल में पढ़ाया जाता है। यहां तक कि पहली कक्षा का बच्च भी अपनी उपस्थिति स्वयं दर्ज करता है। इसके लिए उसका स्वयं का एक कार्ड होता है जिसे वह भरता है। बच्च खिलौनों और एबीएल किट के माध्यम से स्वयं पढ़ाई करता है और टीचर उसकी सहायता करता है। पद्धति में यह भी प्रावधान है कि पहली से चौथी तक बच्चों को किसी प्रकार का होमवर्क न दिया जाए। खास बात यह कि 40 बच्चों की कक्षा में पांच-पांच बच्चों का ग्रुप बांट दिया जाता है और यह पढ़ाई इतनी रोचक होती है कि बच्चे का ध्यान यहां-वहां न भटके।
स्वयं का ब्लैक बोर्ड
जिन स्कूलों में एबीएल चल रही है वहां विद्यार्थियों का स्वयं का ब्लैक बोर्ड होता है जो उनकी हाइट के मद्देनजर तैयार किया जाता है। इस पद्धति में लिखा-पढ़ी ज्यादा नहीं होती बल्कि मूल बात को विद्यार्थियों को समझाने की कोशिश की जाती है। खास ध्यान भाषा और बेसिक पर दिया जाता है।
एबीएल में वार्षिक परीक्षा और पास-फेल का चक्कर नहीं है बल्कि स्टेज होती है। जिसे विद्यार्थी स्वयं क्रास करता है और उसकी ग्रेडिंग होती है। विद्यार्थियों मन लगाकर पढ़ाई करें इसलिए उन्हें आकर्षित करने वाली वस्तुओं जैसे कठपुतली, पेपर क्राफ्ट, चित्र आदि से पढ़ाया जाएगा।
इनका कहना है
70 शिक्षकों का दल तमिलनाडु भेजा जा रहा है। वहां एक्टिविटी बेस्ट र्ल्िनग प्रोग्राम चल रहा है। चूंकि वहां अच्छे परिणाम सामने आए हैं और हमारे शिक्षक भी वहां जाकर देखें तो यह अच्छी बात है।
एमएम उपाध्याय, प्रमुख सचिव, स्कूल शिक्षा