bhaskar Web English
HomeNewsMetrosJaipur Jaipur

पहले निरस्त फिर गुपचुप बहाल

जयपुर. राजस्थान हाउसिंग बोर्ड की द्वारिकापुरी योजना में निरस्त आबंटनों की बहाली में अनियमितता उजागर होने के बाद ऐसे दो दर्जन और मामलों का पता लगते ही बोर्ड प्रशासन ने बुधवार को उप आवासन आयुक्त कार्यालय से प्रकरण की फाइल तलब कर जांच के निर्देश दे दिए।

गौरतलब है कि 2006 में यह योजना 5000 रु. मासिक आय वालों के लिए प्रतापनगर के सेक्टर 26 में शुरू की गई थी। लॉटरी के जरिए 3000 आवेदकों को सफल घोषित किया था, लेकिन मुख्यमंत्री के पास शिकायतें पहुंचीं कि योजना में अधिक आय वर्ग वालों ने भी आवेदन कर दिया।

इसकी जांच के लिए बोर्ड ने एक प्राइवेट सर्वे कंपनी से फील्ड इन्वेस्टीगेशन कराने के बाद 1189 सफल आवेदकों के आबंटन निरस्त कर दिए। हालांकि उनकी आपत्तियों को सुनने के लिए बोर्ड की ओर से बनाई गई समिति ने आबंटन बहाल करने से इनकार कर दिया।

इसके बावजूद कुछ चहेतों को गुपचुप बहाल कर दिया। भास्कर में इस बारे में खबर छपने के बाद बुधवार को दिनभर बोर्ड प्रशासन में खलबली मची रही। इसी दौरान 1189 प्रभावितों में से कई लोग बोर्ड मुख्यालय पहुंचे और अफसरों को खरी-खोटी सुनाते हुए सर्वे करने वाली एजेंसी पर भी सवालिया निशान खड़े किए।

बहाल किए 10 आबंटन

एक आवेदक को सूचना के अधिकार के तहत दी गई जानकारी में बोर्ड ने बताया है कि द्वारिकापुरी योजना में सिर्फ 11 आबंटनों को बहाल किया गया है, जिनमें से एक न्यायालय के निर्णय की अनुपालना में हुआ, जबकि 10 आबंटन अफसरों की अनुशंसा से हुए हैं। किसी मामले में तो शपथ पत्र को ही आधार माना गया है, जबकि कई मामलों में जांच एजेंसी को गलत ठहराया गया है और कुछ मामले ऐसे भी हैं, जिनमें आवेदकों की आपत्ति के बाद भी जांच एजेंसी को ही सही ठहराया गया।

राज्य से बाहर के आवेदकों का फील्ड इन्वेस्टीगेशन नहीं

द्वारिकापुरी योजना में राजस्थान के बाहर के 43 आवेदकों को लॉटरी में सफल घोषित किया गया था, लेकिन इनमें से किसी का भी फील्ड इन्वेस्टीगेशन नहीं कराया गया। खुद बोर्ड अधिकारी इस बात को स्वीकार करते हैं कि बाहर के आवेदकों द्वारा प्रस्तुत शपथ पत्रों को ही आय का आधार माना गया।





अपने विचार यहां लिखें
नाम:
ईमेल आईडी:
भाषा चुनॆ
हिन्दी रॊमन‌ हिन्दी फॊनॆटिक English
विचार:
कोड: