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बहुओं को भी आरक्षण

जयपुर. राजस्थान हाईकोर्ट ने बुधवार को एक महत्वपूर्ण निर्णय में आरक्षित वर्ग की अन्य राज्यों में जन्मी व उसी वर्ग में विवाह के बाद राजस्थान में रह रही महिलाओं को राज्य का स्थायी निवासी मानते हुए उन्हें सरकारी नौकरियों में आरक्षण का लाभ दिए जाने के निर्देश दिए हैं।

न्यायाधीश पीबी मजूमदार ने आरपीएससी के आदेश के खिलाफ दायर सेन्द्रा बाई व 34 अन्य महिलाओं की याचिकाओं को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए यह फैसला सुनाया। उनकी दलील दी थी कि वे आरक्षित वर्ग की हैं तथा उनका विवाह राज्य के आरक्षित वर्ग के परिवारों में हुआ है।

उनके नाम वोटर लिस्ट व राशन कार्ड में भी हैं तथा विवाह के बाद वे राजस्थान की स्थाई निवासी हैं। जबकि आरपीएससी ने उन्हें तृतीय श्रेणी अध्यापक भर्ती परीक्षा में राजस्थान का स्थाई निवासी नहीं मानते हुए आरक्षण का लाभ देने से मना कर दिया था।

हाईकोर्ट ने कहा कि आरक्षित वर्ग की अन्य राज्यों की महिलाओं को राज्य की ओर से संबंधित वर्ग का आरक्षण प्रमाण पत्र जारी करने के बाद उन्हें आरक्षण दिए जाने से इंकार नहीं किया जा सकता।

अदालत ने आरपीएससी को यह भी कहा कि यदि वह चाहे तो प्रत्येक याचिकाकर्ता अभ्यर्थी के मामले में अलग-अलग जांच कर प्रमाण पत्र जारी करने वाले अधिकारियों से यह प्रमाणित करवाए कि क्या वे वास्तव में राज्य की निवासी हैं और उनके द्वारा पेश किए प्रमाण पत्र नियमानुसार हैं। इसके बाद ही आरपीएससी यह निर्धारित करे कि आरक्षण लाभ के अधिकारी हैं अथवा नहीं।





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