जयपुर.
राज्य विधानसभा ने बुधवार को पैराटीचर्स, लोकजुम्बिश, शिक्षाकर्मी समेत 33 हजार शिक्षकों को नियमित करने के लिए राजस्थान पंचायतीराज संशोधन विधेयक 2008 पारित कर दिया। अब समस्त शिक्षकों को तृतीय श्रेणी की नियमित वेतन श्रंखला का लाभ मिल सकेगा। इसके लिए राजस्थान पंचायतीराज प्रबोधक सेवा के नाम से नई सेवा का गठन किया जाएगा। इसमें नियुक्त अध्यापकों के वेतन के लिए 2007-08 में 850 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है।
शिक्षामंत्री कालीचरण सराफ ने विधेयक पर हुई बहस का जवाब देते हुए बताया कि राज्य में दूरस्थ गांवों और ढाणियों में प्रारंभिक शिक्षा की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए इस नई सेवा का गठन किया जा रहा है। इसके सेवा नियम भी बनाए जाएंगे। इसमें तृतीय श्रेणी के शिक्षक प्रबोधक कहलाएंगे और द्वितीय श्रेणी के शिक्षक वरिष्ठ प्रबोधक होंगे।
शिक्षाकर्मी बोर्ड को भंग नहीं किया जाएगा। इस बोर्ड में नियुक्त शिक्षक अपनी वरिष्ठता के अनुसार जहां रहना चाहे, रह सकेंगे। गैर प्रशिक्षित शिक्षकों को प्रशिक्षित होने तक हटाया नहीं जाएगा।
इस विधेयक के माध्यम से संबंधित जिले के अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी एवं जिला शिक्षा अधिकारी (प्रारंभिक शिक्षा) की कमेटी इनकी नियुक्ति करेगी। विधवा और तलाकशुदा महिलाओं के आरक्षित पदों के मामले में चयन राज्य सरकार की छानबीन समिति द्वारा किया जाएगा। इसमें उर्दू समेत ऐसे सारे शिक्षक शामिल किए जाएंगे जो नियमित नियुक्ति के योग्य होंगे। अनुसूचित जाति व जनजाति के अध्यापकों के बारे में उन्होंने कहा कि उनके हितों का संरक्षण किया जाएगा तथा बैकलॉग पूरा किया जाएगा।
325 व्याख्याता भी स्थायी होंगे
विधानसभा में बुधवार को राजस्थान विश्वविद्यालयों के अध्यापक (अस्थाई अध्यापकों का आमेलन) विधेयक, 2008 संशोधित रूप में पारित किया गया। विधेयक पास होने से राज्य के 325 अस्थाई प्राध्यापक स्थाई हो जाएंगे जो लंबे समय से कार्यरत हैं।
उच्च शिक्षा मंत्री कालीचरण सराफ ने विधेयक के उद्देश्य और कारणों की जानकारी देते हुए बताया कि विश्वविद्यालयों के बड़ी संख्या में रिक्त पदों और अध्यापकों की कमी से शैक्षिक वातावरण पर पड़ रहे प्रतिकूल प्रभाव को समाप्त करने के लिए अस्थाई शिक्षकों को नियमित करने के विधेयक में प्रावधान किया गया है।
इस विधेयक के पारित होने से राजस्थान विश्वविद्यालय में 1994 में नियुक्त 154 व 1997 में नियुक्त 127 प्राध्यापक स्थाई हो जाएंगे। इसके अलावा जोधपुर के जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय और उदयपुर के सुखाड़िया विश्वविद्यालय में अस्थाई प्राध्यापक स्थाई हो जाएंगे।
उच्च शिक्षा मंत्री ने बताया कि राजस्थान विश्वविद्यालय ने 237 और पद भरने की अनुमति दी है। इसके अलावा अन्य विश्वविद्यालयों में भी 25 प्रतिशत रिक्त पद भरने की अनुमति दे दी गई है। अस्थाई प्राध्यापकों को नियमित करने के संबंध में महाधिवक्ता की राय ली गई है। साथ ही सदन के सदस्यों और राजस्थान विश्वविद्यालय शिक्षक संघ से भी विचार विमर्श किया गया है।