इंदौर. नगर निगम आय बढ़ाने की जुगत में पुरानी योजनाओं को नए रैपर में परोसने की तैयारी में है। नौ साल पहले बंद पटरी शुल्क भी फिर लाया जा रहा है। इसकी योजना बाजार समिति ने बनाई है। घोषणा होगी बजट के साथ।
योजना के मुताबिक हर वार्ड में एक-एक बेरोजगार को पटरी शुल्क वसूली का ठेका दिया जाएगा। उसे एक मशीन देंगे जिसमें पांच या दस रुपए की पर्चियां निकलेंगी। वसूली सड़क पर खड़े होने वाले ठेलों व अन्य वेंडर्स से प्रतिदिन और हाट बाजार में की जाएगी।
बाजार समिति प्रभारी रहीं शांता झंवर ने बताया इससे निगम को लगभग डेढ़ करोड़ रुपए की सालाना आय होगी। 1999 में बंद योजना को फिर लागू करने के औचित्य पर उन्होंने बताया इस तरह लागू करेंगे कि निगम को आमदनी हो। बाजार समिति के मौजूदा प्रभारी अनिल बिंदल के मुताबिक अवैध वसूली तो हो ही रही है और निगम के खाते में कुछ नहीं आता। फिर लागू करने से निगम को आमदनी होगी। ठेकेदार को कमीशन के आधार पर भुगतान किया जाएगा इसलिए गड़बड़ी की संभावना भी कम रहेगी। उसी आमदनी से इन इलाकों को व्यवस्थित करेंगे। प्रदेश के अन्य नगर निगमों में भी यह व्यवस्था लागू है।