इंदौर. वह जिस्म में तीन तीर लेकर पांच दिन तक तीन शहरों में भटकता रहा। कहीं थोड़े इलाज के बाद डॉक्टरों ने हाथ खड़े कर दिए तो कहीं भर्ती करने से ही मना कर दिया गया। प्रदेश के बाहर भी गया लेकिन लौटना पड़ा। हारकर एमवायएच आया तो यहां चंद घंटों में ही उसकी हालत में सुधार आया।
आलीराजपुर निवासी खदानसिंह को विवाद के चलते 14 मार्च को किसी ने सात तीर मार दिए थे। इनमें से तीन पेट में, एक बाजू में और तीन पीठ में लगे। कुछ इतने गंभीर थे कि रीढ़ की हड्डी में घुस गए। उसे आलीराजपुर हॉस्पिटल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने आसानी से निकल सकने वाले चार बाहरी तीर निकाल दिए। तीन दिन रखने के बाद उसे एमवायएच या वडोदरा ले जाने के लिए कहा गया। पास होने के कारण परिजन उसे वडोदरा ले गए तो वहां डॉक्टरों ने हालत देखते हुए उसे भर्ती करने से ही इनकार कर दिया।
तब परिजन वापस आलीराजपुर ले आए। इस दौरान तीन तीर उसके जिस्म में ही थे और हालत लगातार बिगड़ती जा रही थी। पेट में काफी मवाद भी इकट्ठा हो गया था। इस बार आलीराजपुर के डॉक्टरों ने उसे एमवायएच ले जाने की सलाह दी। परिजन मंगलवार को उसे एमवायएच लेकर आए। यहां डॉ. डी.के. जैन के मार्गदर्शन में डॉ. अंकुर माहेश्वरी, डॉ. नितेश पाटीदार एवं डॉ. नवीन गुप्ता ने रात 10 बजे उसका ऑपरेशन किया। चंद घंटों बाद खदानसिंह की स्थिति सुधरने लगी। फिलहाल वह सर्जिकल आईसीयू में भर्ती है और खतरे से बाहर है।