bhaskar Web English
HomeNewsNational National

अंग्रेजी भाषी देशों की डिग्री को हां

नई दिल्ली अंग्रेजी भाषी देशों से मेडिकल डिग्री प्राप्त भारतीय डॉक्टर अब वतन लौटने के बारे में सोच सकते हैं। देश में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी से निपटने के लिए सरकार ने अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, न्यूजीलैंड और ब्रिटेन में दी जाने वाली पोस्ट ग्रेजुएट (पीजी) मेडिकल डिग्री को मान्यता देने का फैसला किया है।

शर्त यह होगी कि ये डिग्रियां इन देशों में भी संबंधित विशेषज्ञता के लिए मान्यता प्राप्त होनी चाहिए। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने अपने एक ताजा आदेश में मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआई) को इन देशों में मिलने वाली डिग्री को सशर्त मान्यता देने की मंजूरी दे दी है। एमसीआई अब तक जापान, इटली, जर्मनी, आयरलैंड, दक्षिण अफ्रीका, हांगकांग, बर्मा और नेपाल जैसे गैर-अंग्रेजी भाषी देशों की मेडिकल डिग्री को ही मान्यता देता आया है।

स्वास्थ्य मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि अंग्रेजी भाषी देशों की डिग्री को मान्यता देने से अब छात्र न केवल इन देशों में पीजी मेडिकल की पढ़ाई कर पाएंगे, बल्कि भारत लौटकर विशेषज्ञ मेडिकल विभागों में प्रैक्टिस भी कर पाएंगे।

डॉक्टर-जनसंख्या अनुपात

>> देश में 6,83,582 रजिस्टर्ड एलोपैथिक डॉक्टर हैं। एलोपैथिक डॉक्टरों और जनसंख्या का अनुपात 1:1634 है।

>> इसके अलावा देश में भारतीय चिकित्सा पद्धति व होम्योपैथी के छह लाख से अधिक विशेषज्ञ हैं। >> इस तरह देश में कुल डॉक्टर और जनसंख्या का अनुपात 1:870 है।

(एमसीआई के मुताबिक)मेडिकल कॉलेज

>> देश में 271 मेडिकल कॉलेज हैं। >> इनमें से 138 सरकारी हैं, जबकि बाकी के 133 मेडिकल कॉलेज निजी समूह चलाते हैं। >> एमबीबीएस स्तर पर कॉलेजों की प्रवेश क्षमता 31,172 छात्र प्रतिवर्ष है। पीजी मेडिकल कोर्सेज में उपलब्ध सीटों की संख्या 11,005 प्रतिवर्ष है।





अपने विचार यहां लिखें
नाम:
ईमेल आईडी:
भाषा चुनॆ
हिन्दी रॊमन‌ हिन्दी फॊनॆटिक English
विचार:
कोड: