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फोरेंसिक जांच में गुरुमुखी की मदद

लंदन.ब्रिटेन के फोरेंसिक विशेषज्ञों ने पंजाबी भाषा की लिपि गुरुमुखी को एक ऐसी तकनीक के विकास में इस्तेमाल किया है जिससे लेखकों के मूल और आयु के बारे में पता लगाया जा सकता है। यह एक ऐसी विधि है, जिससे दस्तावेजों में फर्जीवाड़ा करने वाले लेखकों के बारे में पता लगाया जा सकता है।

डेरबी यूनिवर्सिटी के अनुसंधानकर्ता ने लेखकों की पहचान के लिए पंजाबी भाषा के सभी वर्णो वाले एक वाक्य को इस्तेमाल किया।

लिखाई खोलेगी राज

अंग्रेजी भाषा में सभी वर्णो को शामिल करने वाला वाक्य ‘ए क्विक ब्राउन फाक्स जंप्स ओवर द लेजी डॉग’ काफी जाना पहचाना वाक्य है। विशेषज्ञों ने पंजाबी भाषा के भी एक ऐसे ही वाक्य का इस्तेमाल किया जिसमें इस भाषा के सभी 40 वर्णाक्षर शामिल थे। अनुसंधानकर्ताओं ने ऐसा यह जानने के लिए किया कि क्या इससे लेखक की पृष्ठभूमि तैयार करने में मदद मिल सकती है।

इस वाक्य को 200 स्वयंसेवियों से लिखवाया गया जिससे पता चला कि उनकी हैंड राइटिंग से यह जाना जा सकता है कि संबंधित लेखक क्या मूल रूप से विदेश का रहने वाला है, या उसकी पहली पीढ़ी भारत या पाकिस्तान में पैदा हुई। उसके बाद वह पीढ़ी ब्रिटेन आ गई और दूसरी पीढ़ी ब्रिटेन में पैदा हुई।

इस अध्ययन से फोरेंसिक विज्ञान के लिए महत्वपूर्ण मदद मिल सकती है, खासकर उस मामले में जहां पुलिस मामले की जांच कर रही हो और जिसमें कोई दस्तावेज या धमकीपूर्ण पत्र लिखने वाले की पहचान किए जाने की आवश्यकता हो।





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