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मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने चंडीगढ़ में खत्म होते जा रहे पंजाब के कंट्रोल पर गहरी चिंता जताते हुए प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह को चेतावनी दी है कि चंडीगढ़ प्रशासन में पंजाब के पदों को घटाने की कार्रवाई तुरंत बंद की जाए।
पीएम को लिखे पत्र में मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा है कि चंडीगढ़ केवल पंजाब की राजधानी है और वे अपने प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए इसे तुरंत पंजाब को सौंपने का काम शुरू कराएं। चंडीगढ़ में सभी पदों को 60:40 के अनुपात में तय किया है। बादल के मुताबिक यूटी प्रशासन तय नियमों की अनदेखी कर रहा है, जो पंजाब कभी बर्दाश्त नहीं करेगा।
चंडीगढ़ को स्थाई तौर पर केंद्र शासित बनाने की कोशिश :
बादल ने कहा कि उन्हें इस बात से गहरा धक्का लगा है कि चंडीगढ़ को स्थायी तौर पर केंद्र शासित प्रदेश बनाने की कोशिश हो रही है। सीएम के मीडिया सलाहकार हरचरण बैंस ने बताया कि बादल यह मुद्दा पीएम से अगली मीटिंग में जोरदार ढंग से उठाएंगे, क्योंकि यह असहनीय कदम है। बादल ने यह सख्ती यूटी प्रशासन के प्रिंसिपल मेडिकल अफसर कम डायरेक्टर हेल्थ और संयुक्त प्रिंसिपल मेडिकल ऑफिसर के पदों के बारे में नियमों में बदलाव के कारण उठाया है।
ये पद पंजाब और हरियाणा से डेपुटेशन पर भरे जाते हैं, लेकिन यूटी प्रशासन इन्हें अपने काडर से भरने के फेर में है। पंजाब पुनर्गठन 1966 के बाद से ये पद पंजाब-हरियाणा के अधिकारियों से ही भरे जाते रहे हैं।
ये तैनाती चार-चार वर्ष के लिए होती है। बादल ने कहा कि चंडीगढ़ के साथ पंजाबियों की भावनाएं जुड़ी हैं।
60:40 का अनुपात:
पंजाब पुनर्गठन एक्ट 1966 के अनुसार यूटी चंडीगढ़ में अधिकारियों-कर्मचारियों के विभिन्न पद 60:40 के अनुपात में पंजाब और हरियाणा से डेपुटेशन पर भरने की व्यवस्था है। इस संबंध में दिशा निर्देश केंद्रीय गृह मंत्रालय के पत्र नंबर 14-66 के मुताबिक लागू किया गया है।