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पीयू की हालत सुधारेगा सेंट्रल यूनिवर्सिटी स्टेटस

चंडीगढ़ पीयू में एमफिल में एनरोल होने वाले प्रत्येक स्टूडेंट को हर महीने 3 हजार रुपए और पीएचडी में एनरोल होने वाले प्रत्येक स्टूडेंट को हर महीने 5 हजार रुपए बतौर फैलोशिप मिलेंगे। यही नहीं, पीयू के टीचरों और पीयू को भी आर्थिक तौर पर कई मोर्चे पर राहत मिल सकती है। बशर्ते, पीयू को सेंट्रल यूनिवर्सिटी स्टेटस मिल जाए।

पीयू को सेंट्रल यूनिवर्सिटी स्टेटस मिलने के बाद आर्थिक मोर्चे पर केंद्र और पंजाब सरकार का मोहताज नहीं रहना पड़ेगा। साथ ही आय बढ़ाने के लिए हर साल नए कोर्स शुरू करने की चिंता से भी निजात मिल जाएगी। अभी पीयू का सालाना बजट करीब 135 करोड़ रुपए है। पीयू द्वारा अपने संसाधनों से जुटाए जाने वाले पैसे के अलावा बजट का बाकी हिस्सा केंद्र और पंजाब सरकार द्वारा 60:40 के अनुपात में दिया जाता है। केंद्र तो अपना हिस्सा दे रहा है।

पंजाब सरकार को हर साल करीब 24 करोड़ पीयू को अदा करने होते हैं, लेकिन वह सिर्फ 6 करोड़ ही दे रही है। सेंट्रल यूनिवर्सिटी स्टेटस मिलने पर यह सारा गणित बदल जाएगा और पीयू को पूरी ग्रांट केंद्र ही देगा। ऐसे में पीयू के सभी वर्र्गो के लिए सेंट्रल यूनिवर्सिटी स्टेटस राहत देगा।

कैसे बदलेंगे हालात: पीयू का प्लान बजट अभी 3.5 करोड़ है, लेकिन सेंट्रल यूनिवर्सिटी स्टेटस मिलने पर यही बजट 40 से 50 करोड़ हो जाएगा। इलाहबाद यूनिवर्सिटी को पूर्व मानव संसाधन मंत्री मुरली मनोहर जोशी के कार्यकाल में सेंट्रल यूनिवर्सिटी स्टेटस मिला। उस वक्त इलाहबाद यूनिवर्सिटी का बजट 14 करोड़ था जो अब बढ़कर 114 करोड़ हो गया है।

सेंट्रल यूनिवर्सिटी स्टेटस मिलने पर बढ़ने वाले बजट का असर पीयू की डवलपमेंट पर दिखेगा। लगातार फीसें बढ़ने पर न सिर्फ रोक लगेगी बल्कि फीसें कम होंगी। जेएनयू दिल्ली में मौजूदा ट्यूशन फीस 216 रुपए सालाना है जबकि पीयू में यह फीस 1300 है।





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