वाशिंगटन. शोधकर्ताओं ने एक ऐसे उपकरण का विकास किया है, जिससे किसी व्यक्ति के 20 पीढ़ी पीछे की जीनोम संरचना या जैविक रिकार्ड को डीकोड किया जा सकता है। अभी इस संबंध में और परीक्षण किए जाने बाकी हैं।
स्टेनफोर्ड यूनिवर्सिटी के सीराफिम बेटझोगलू के नेतृत्व में शोधकर्ताओं की टीम ने एक ऐसे मॉडल का विकास किया, जिससे वंशानुगत आधार पर जीनोम की खासियतों को बताया जा सकता है।
इंटरनेशनल हैपमैप प्रोजेक्ट के तहत हुए इस शोध में मानवीय जीन में अंतर के सामान्य नमूने पर अध्ययन किया गया था। इसके आंकड़ों के विश्लेषण के मुताबिक किसी भी व्यक्ति के कई पीढ़ी पीछे तक के वंशानुगत जीनोम का पता किया जा सकता है।
शोधकर्ता सुंडकिस्ट ने कहा कि लोगों पर परीक्षण किए गए। इसके परिणाम से यह स्पष्ट हुआ कि अभी भी आपस में जुड़ी हुए जनसंख्या के जीनोम संबंधी अंतर की जानकारियों की चुनौतियां बरकरार हैं पर इस दिशा में प्रगति हुई है।