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रिहा होंगे भारत-पाक की जेलों में बंद कैदी

चंडीगढ़. पाकिस्तान में मौत की सजा का सामना कर रहे सरबजीत की पहचान को लेकर उठे विवाद का भले ही अभी समाधान नहीं हुआ हो, लेकिन भारत व पाक ने एक-दूसरे की जेलों में बंद लोगों की रिहाई के लिए प्रक्रिया शुरू कर दी है। कैदियों के मुद्दे पर दोनों देशों के जजों की आठ सदस्यीय संयुक्त समिति की पहली बैठक अप्रैल के पहले सप्ताह में इस्लामाबाद में होगी।

समिति में दोनों देशों के चार-चार सदस्य हैं। समिति का गठन जनवरी में किया गया था जिसमें भारत की ओर से दिल्ली हाईकोर्ट के पूर्व जज एमए खान, पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट के पूर्व जज अमरबीर सिंह गिल व अमरजीत चौधरी और पटना हाईकोर्ट के पूर्व जज नगेंद्र राय शामिल हैं। ये 6 अप्रैल को पाकिस्तान रवाना होंगे।

पाक सदस्य :

नासिर असलम जाहिद, फजल करीम, चौधरी अब्दुल कादिर और मियां मोहम्मद अजमल समिति के पाकिस्तानी सदस्य हैं। अजमल तो पश्चिमोत्तर सीमांत प्रांत की सरकार में मंत्री भी हैं।

महिलाओं, बच्चों को प्राथमिकता :

भारतीय दल के एक सदस्य ने कहा कि महिलाओं, बच्चों व मानसिक संतुलन खो चुके कैदियों की रिहाई समिति की प्राथमिकता होगी। उन्होंने युद्धबंदियों व जासूसों के अलावा सरबजीत जैसे मामले पर भी विचार से इनकार नहीं किया।

करीब एक हजार कैदी :

एक अधिकृत अनुमान के अनुसार 500 से ज्यादा पाकिस्तानी भारत की विभिन्न जेलों में बंद हैं। इसी प्रकार भारत के 450 नागरिक पाकिस्तानी जेलों में बंद हैं।

राष्ट्रीयता पर विवाद :

भारत व पाक की जेलों में ऐसे कैदियों की बड़ी संख्या है जो अदालतों द्वारा दी गई सजा पूरी करने के बावजूद रिहा नहीं हुए हैं। कई तो राष्ट्रीयता पर विवाद के कारण अपने वतन नहीं लौट पा रहे हैं।





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