इंदौर.
नगर निगम शहर में लगे करीब 20000 सोडियम लैम्प हटाकर इनकी जगह एनर्जी सेविंग सीएफएल लैम्प लगाने जा रहा है। इसके लिए टेंडर 3 अप्रैल को खोले जाएंगे। यह काम मई में शुरू होगा और अगले छह महीनों में लैम्प बदल दिए जाएंगे। नए लैम्प लगने के बाद निगम के बिजली के बिल में करीब डेढ़ करोड़ रुपए सालाना की बचत होगी। इसके अलावा कार्बन क्रेडिट से भी निगम को आमदनी होगी।
निगम के सिटी इंजीनियर हंसकुमार जैन के मुताबिक सीएफएल लैम्प का प्रयोग वीआईपी रूट पर किया जा चुका है। इन्हें पिछले साल ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट से पहले वीआईपी रोड पर लगाया गया था। इसके परिणाम अच्छे रहे हैं इसलिए अगले चरण में ऐसे ही लैम्प लगाने का निर्णय लिया है। नए काम के टेंडर खुलने के एक महीने बाद सोडियम लैम्प हटाने का काम शुरू होगा और छह महीनों में पूरा होगा।
20000 सोडियम लैम्प की कीमत करीब 12 करोड़ रुपए है। इन्हें बदलने के लिए पहले 17 मार्च को भी टेंडर बुलाए थे और इसमें दो कंपनियों ने रुचि दिखाई थी। दस्तावेज अधूरे होने के कारण टेंडर दोबारा बुलाना पड़े। उम्मीद है अबकि बार कंपनियां पूरे दस्तावेजों का प्रबंध कर लेंगी। उन्होंने बताया फिलहाल लगे सोडियम लैम्प 150 से 250 वॉट के हैं। इनकी जगह 100 वॉट के सीएफएल लैम्प लगाए जाना हैं। इनके लगने से बिजली की खपत 50 प्रतिशत तक गिर जाएगी। जिस कंपनी को यह काम सौंपा जाएगा वही लैम्पों का मेंटेनेंस भी करेगी। कंपनी को पांच साल का ठेका दिया जाएगा।
बदले गए लैम्पों का उपयोग निगम सीमा में नहीं
सिटी इंजीनियर के मुताबिक निगम ने कंपनियों से यह शर्त रखी है कि जिन सोडियम लैम्पों को निकाला जाएगा, उनका उपयोग नगर निगम सीमा में नहीं हो सकेगा। इसके अलावा कंपनी को ऐसी सभी लाइटें सुधारना और बदलना होंगी जो जांच के दौरान बंद या खराब हैं।
सेंट्रल लाइट की फिटिंग्स नहीं बदलेगी
श्री जैन ने बताया फिलहाल जिन 20000 सोडियम लैम्प को बदला जाना हैं, उनमें सेंट्रल लाइटिंग की फिटिंग्स शामिल नहीं है। ऐसा इसलिए क्योंकि इनकी फिटिंग्स ज्यादा पुरानी नहीं हैं।
यहां नहीं लग सकेंगे
>> एमजी रोड ठ्ठ आरएनटी मार्ग ठ्ठ धार रोड का शहरी हिस्सा
>> रिंगरोड ठ्ठ एबी रोड ठ्ठ अन्नपूर्णा रोड
इनमें से एबी रोड की सेंट्रल लाइटिंग बस रैपिड ट्रांजिट सिस्टम के लिए बन रहे कॉरिडोर के लिए हटाई जाएंगी। इससे पहले निगम शहर में लगी करीब 25000 ट्यूबलाइटों में से 22000 को बदलकर एनर्जी सेविंग ट्यूबलाइटें लगा चुका है।
फायदे और भी..
>> लैम्प बदलते वक्त यह भी जांचा जाएगा कि कहीं गलत तरीके से बिजली तो नहीं ली जा रही।
>> फिलहाल निगम का सालाना बिजली खर्च पांच से छह करोड़ रुपए के बीच आता है। 20000 सीएफएल लैम्प लगने से करीब डेढ़ करोड़ रुपए तक का खर्च बचने की उम्मीद है।
>> निगम को लैम्पों के मेंटेनेंस से मुक्ति मिलेगी। इसका खर्च बचेगा।
>> जितनी राशि बचेगी उससे कंपनी को किस्त दी जाएगी और नए स्थानों पर लाइटें लगाने का प्रबंध हो सकेगा।
>> कार्बन क्रेडिट के माध्यम से भी निगम को आय होगी। इसके तहत एक टन कार्बन ऑक्साइड का उत्सर्जन कम करने पर निगम को एक कार्बन क्रेडिट मिलेगा। हर क्रेडिट के लिए निगम को करीब 800 रुपए मिलेंगे।
इनसे फैलता है शहर में उजाला
>> 20000 सोडियम लैम्प
>> 5000 सेंट्रल लाइटिंग फिटिंग्स (2500 खंभे) 25000 ट्यूबलाइट (22000 एनर्जी सेविंग)
>> 25 हाईमास्ट (इसके अलावा जल्द ही शहर के 150 बगीचों में नई लाइटें लगाने की योजना है।)