इंदौर. सहकारिता विभाग के अधिकारियों ने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर एक ऐसी संस्था को जमीन बेचने की अनुमति दे दी जिस पर विभाग के ही ऑडिटर ने ऑडिट में आपत्ति ली थी। सारे नियमों को ताक पर रख कर आवेदन करने के मात्र तीन दिन में ही यह अनुमति दे दी गई। इतना ही नहीं संस्था की मूल रजिस्ट्री पुलिस रजिस्ट्रार संपत्ति के यहां से 420 के प्रकरण में जब्त कर चुकी है।
अमरदीप गृह निर्माण सोसायटी के नाम पर अरंडिया गांव में करीब ४क् करोड़ की ३९ एकड़ कृषि भूमि है। संस्था द्वारा इसे बेचने के लिए 23 जुलाई 07 को संयुक्त पंजीयक सहकारी संस्थाएं वी.पी. मारन को आवेदन किया गया। उक्त संस्था के ऑडिट में कई तरह की आपत्तियां भी ऑडिटर ने दर्ज की थीं। इसके बावजूद संयुक्त पंजीयक श्री मारन ने तीन दिन में 27 जुलाई 07 को संस्था को जमीन बेचने का अनुमति पत्र जारी कर दिया। जबकि सहकारिता विभाग द्वारा १ जनवरी २क्क्७ से गृह निर्माण सहकारी संस्थाओं पर संपूर्ण अधिकार खत्म कर डिप्टी रजिस्ट्रार के पास दे दिए गए हैं। जमीन बेचने की अनुमति देने का अधिकार संयुक्त पंजीयक को है ही नहीं।
रजिस्ट्री भी पुलिस जब्त कर चुकी है
अमरदीप गृह निर्माण संस्था में मात्र ३८ सदस्य ही हैं और ३९ एकड़ जमीन की मूल रजिस्ट्री रजिस्ट्रार संपत्ति के यहां से २क्क्४ में लसूड़ीया थाने में प्रकरण ४२क्, ४६७,४६८, ४७१ के तहत दर्ज होने के बाद पुलिस ने जब्त कर ली थी। अब यह मामला विधायक उषा ठाकुर ने विधानसभा में उठाया है और कृषि और सहकारिता मंत्री गोपाल भार्गव ने पूरे मामले की जांच करा कर कार्रवाई करने का निर्देश दिया है।
2005-06 के ऑडिट में उठी थी आपत्ति :
ऑडीटर आर.एस. शर्मा ने संस्था का ऑडिट किया था उस दौरान उन्होने कई तरह की अनियमितताएं पकड़ी थी और संस्था को चेतावनी दी थी।
यह थी आपत्ति
>> संस्था द्वारा ग्राम अरंडिया में ३९ एकड़ जमीन खरीदी गई जो की संस्था के कार्यक्षेत्र के बाहर की है कार्यक्षेत्र से बाहर जाकर जमीन क्यों खरीदी गई यह स्पष्ट करें? इस प्रकार का कृत्य सदस्यों के हितों लिए प्रतिकूल है इस काम में संस्था का संचालक मंडल दोषी है।
>> संस्था में मात्र ३८ सदस्य हैं जिनके लिए ३९ एकड़ जमीन कार्यक्षेत्र से बाहर जाकर खरीदने की क्या आवश्यकता थी? संस्था अपने कार्यक्षेत्र में रहकर ही काम करे।
>> संस्था के सदस्यों को अमानत के रूप में राशि वापस करने के लिए सदस्यों के आवेदन पत्र रेकार्ड में नहीं है। केश बुक में तारीख नहीं
>> संस्था द्वारा जारी सदस्य सूची में सदस्यों के नाम के सामने लिखी शेयर की राशि बेलेंस शीट से नहीं मिलती।
>> संस्था में ३८ सदस्य थे तो उनके शेयर प्रमाण पत्र क्यों जारी नहीं किए गए।
विभागीय मंत्री के निर्देश पर जांच शुरू कर रहे हैं। जांच में दोषी पाए जाने वाले पर कार्रवाई होगी।
-प्रभात पराशर, आयुक्त सहकारिता
विधानसभा में मामला उठा है मंत्री ने जांच का कहा है उच्चस्तर पर बात है मैं कुछ नहीं कह सकता।
- वी.पी. मारन, संयुक्त पंजीयक सहकारिता विभाग
विधानसभा में प्रश्न उठा है यह जानकारी है लेकिन मुझे इस मामले की अन्य कोई जानकारी नहीं है।
- अंबरीश वैद्य, डिप्टी रजिस्ट्रार सहकारिता