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स्कीम 136 व 140 के प्लॉट आवंटन पर रोक

इंदौर. मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने इंदौर विकास प्राधिकरण की स्कीम-136 और 140 के प्लॉट आवंटन पर आगामी आदेश तक रोक लगा दी है। स्कीम के नक्शों में भूमालिक गृह निर्माण सहकारी संस्थाओं को दिए जाने वाले 20 प्रतिशत विकसित प्लॉट का एरिया अंकित नहीं किया गया है। ऐसा करने से पहले स्कीमों के प्लॉट नहीं बेचे जा सकते। हालांकि प्राधिकरण का कहना है फैसला सिर्फ स्कीम-136 पर लागू होगा।

इंदौर खंडपीठ के जस्टिस विनय मित्तल ने भूमालिक संस्थाओं व एक व्यक्ति की याचिका पर सुनवाई के दौरान ये निर्देश दिए। इससे पहले हाईकोर्ट ने 7 दिसंबर 2007 को प्राधिकरण को आदेश दिए थे कि स्कीमों के तहत अधिग्रहित जमीन के मालिकों को आवास नीति के अनुसार 20 प्रतिशत विकसित प्लॉट देने की व्यवस्था करे लेकिन प्राधिकरण ने स्कीम-136 और 140 के नक्शों में व्यवस्था नहीं की। इसके खिलाफ भूमालिक अपील में गए।

प्राधिकरण ने गुरुवार को हाईकोर्ट को दलील दी कि स्कीमों में 20 प्रतिशत विकसित प्लॉट देने की व्यवस्था कर ली है लेकिन हाईकोर्ट ने कहा यह तभी माना जाएगा जब नक्शे में मार्क कर दिया जाए। अगली सुनवाई 3 अप्रैल को होगी।

याचिका पांच गृह निर्माण सहकारी संस्थाओं (महावीर, विनयनगर, आदर्श मैकेनिकनगर, सुखलियाग्राम व मालवीयनगर) और नानूराम जामले ने दायर की थी। फॉर्म वितरण और संग्रहण जारी रहेगा

प्राधिकरणके विधि अधिकारी एम.बी. मूथा ने बताया स्कीम-134, 136 और 140 के फॉर्म वितरण व संग्रहण का काम पहले की तरह जारी रहेगा। आदेश के बाद सिर्फ स्कीम-136 के प्लॉटों का आवंटन स्थगित रहेगा। इसके लिए भी हाईकोर्ट में अपील की जाएगी क्योंकि ये प्लॉट कमजोर आयवर्ग को दिए जाना हैं। जिन भूस्वामियों को हाईकोर्ट ने 20 प्रतिशत विकसित भूखंड देने की मांग की है, उस आदेश के खिलाफ अपील दायर करने के बाद भी स्कीम में 20 प्रतिशत विकसित भूखंड रिजर्व कर दिए हैं।

टाइपिंग की गलती का फायदा लेने की कोशिश की आईडीए ने

फैसला स्कीम-136 के साथ 140 पर भी लागू होगा या नहीं इसे लेकर रात तक विरोधाभास बना रहा। याचिकाकर्ताओं के वकील विशाल वर्मा ने स्पष्ट किया प्राधिकरण दोनों स्कीमों में तब तक प्लॉट आवंटन नहीं कर सकता, जब तक नक्शों में भूमालिकों को दिए जाने वाले विकसित प्लॉट का एरिया मार्क न किया जाए।

प्राधिकरण टाइपिंग की एक त्रुटि के आधार पर गुमराह कर रहा है। नानूराम जामले की याचिका स्कीम-140 को लेकर ही थी। इससे संबंधित सारे दस्तावेजों में यही उल्लेख है। उधर, प्राधिकरण का दावा है निर्णय केवल स्कीम-136 पर लागू होगा क्योंकि श्री जामले की जमीन है तो स्कीम-140 में लेकिन उन्होंने प्रेयर क्लॉज में इसे स्कीम-136 में दर्शाया है। इससे स्कीम-134 और 140 के लॉटरी में वैधानिक अड़चन नहीं होना चाहिए।

शक के दायरे में प्राधिकरण

>> 7 दिसंबर 2007 को हाईकोर्ट ने प्राधिकरण को भूमालिकों को 20 प्रतिशत विकसित प्लॉट देने के आदेश दिए थे। इस मामले में हाईकोर्ट से ही राहत पाने के प्रयास क्यों नहीं किए।
>> प्राधिकरण जमीन देने को तैयार है तो अब तक क्यों नहीं दी।
>> एकतरफ प्राधिकरण मुख्यमंत्री से किसानों को 30 से 35 प्रतिशत विकसित प्लॉट देने की मांग करता है और दूसरी तरफ भूमालिकों को 20 प्रतिशत प्लॉट देने का कोर्ट का फैसला भी नहीं मानता। यानी कथनी और करनी में साफ अंतर।
>> क्या प्राधिकरण के अधिकारी चाहते हैं स्कीम के प्लॉट लॉटरी के बजाय टेंडर से बेचकर तगड़ी कमाई करें और वहां पदस्थ राजनीतिक पदाधिकारी लॉटरी से बेचना चाहते हैं। टेंडर प्रक्रिया में दलाल महत्वपूर्ण हो जाते हैं। सारी टेंडर प्रक्रिया संदेहास्पद लगती है।





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