खरगोन.
कभी गोदामों में जगह न होने का बहाना तो कभी एफएक्यू वेरायटी का गेहूं न होने की बात कहकर समर्थन मूल्य पर माल नहीं खरीदना गुरुवार को सरकारी एजेंसियों के अफसरों को भारी पड़ गया।
खरगोन अनाज मंडी में नीलामी छोड़कर जाने से गुस्साए सैकड़ों किसानों ने पुलिस की मौजूदगी में पहले भारतीय खाद्य निगम इंदौर के तकनीकी सहायक अमिताभ बैनर्जी और बाद में मप्र नागरिक आपूर्ति निगम के जिला प्रबंधक विजयकुमार मोरे की जमकर पिटाई कर दी। उन्हें सुरक्षा घेरे में मंडी कार्यालय ले जाया गया। शाम को इस मुद्दे को लेकर कलेक्टोरेट में बैठक रखी गई जिसमें समस्या का हल निकालने की बात हुई।
व्यापारियों के साथ-साथ सरकारी एजेंसियों द्वारा गेहूं खरीदी में आनाकानी करने से अनाज मंडी में दिनभर विवाद की स्थिति रही। सैकड़ों वाहनों एवं बैलगाड़ियों में करीब 12 हजार क्विंटल माल की मौजूदगी के बावजूद नीलामी बार-बार बंद-चालू होती रही। मंडी सचिव आर.एस. सिकरवार कभी सरकारी एजेंसियों के अफसरों को तो कभी किसानों को मनाते रहे। किसानों के बार-बार भड़कने पर बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात करना पड़ा। किसानों के हाथों पीटे अफसरों ने कलेक्टोरेट में हुई बैठक में अपनी पीड़ा सुनाई। उन्होंने कहा किसान खराब वैरायटी का गेहूं भी समर्थन मूल्य पर खरीदने की जिद कर रहे थे।
उन्हें समझाने गए तो भड़क उठे और हमला कर दिया। हालांकि किसानों ने व्यापारियों द्वारा गेहूं न खरीदने तथा सरकारी एजेंसियों द्वारा नित-नए बहाने बनाने को लेकर रोष जताया। उन्होंने कहा भारतीय खाद्य निगम एक साल से ऑस्ट्रेलिया का सड़ा हुआ लाल गेहूं गुणवत्ता का बताकर देशवासियों को परोसने से परहेज नहीं कर रहा है वहीं हमारे नए एवं अच्छी वेरायटी के गेहूं में खामियां गिनाकर रिजेक्ट कर दिया जाता है।
व्यापारियों और सरकारी एजेंसियों के अफसरों की मिलीभगत के कारण ऐसा हो रहा है। 1100 रुपए प्रति क्विंटल या इससे भी अधिक कीमत के गेहूं को सरकारी एजेंसियों द्वारा न खरीदकर व्यापारियों को औने-पौने दामों पर खरीदने का मौका दिया जा रहा है। बुधवार को भी बहाने बनाकर नीलामी अधूरी छोड़ दी गई थी। अब हम ऐसा किसी भी कीमत पर नहीं होने देंगे।
किसानों ने व्यापारियों के लाइसेंस निरस्त करने तथा मंडी में आया सारा माल समर्थन मूल्य से कम पर नहीं खरीदे जाने की मांग की है। भारतीय किसान संघ के जिलाध्यक्ष दिनेश पाटीदार ने समर्थन मूल्य पर गेहूं न खरीदे जाने को किसानों के साथ अन्याय बताया। अनाज व्यापारी संघ के अध्यक्ष राकेश जैन ने गेहूं के समर्थन मूल्य में देशभर में समानता लाने की बात कहते हुए प्रदेश में इसकी खरीदी को घाटे का सौदा बताया।
मार खाने नहीं आए हैं
मप्र नागरिक आपूर्ति निगम के जिला प्रबंधक विजयकुमार मोरे ने बताया किसान बार-बार खराब गेहूं को खरीदने की मांग कर रहे हैं और नहीं खरीदने पर गाली-गलौज करते हैं। हम गेहूं खरीदने आए हैं मार खाने नहीं। भारतीय खाद्य निगम इंदौर के तकनीकी सहायक अमिताभ बैनर्जी ने बताया हम गुणवत्ता वाला गेहूं ही खरीदेंगे। दबाव बनाना गलत है।