भोपाल. मंत्रालय के आला अफसरों के लिए लैपटाप खरीदी में घोटाले का मामला प्रकाश में आया है। जांच में निर्माता और सप्लायर फर्म की गलती पाए जाने के बावजूद लघु उद्योग निगम प्रबंधन उन्हें काली सूची में डालने के बजाय खरीदी पर लगाई रोक हटाने का रास्ता खोज रहा है,जबकि कंपनी और उसके अधिकारी निगम के पत्रों को कोई तवज्जो नहीं दे रहे हैं।
सूत्रों के मुताबिक सामान्य प्रशासन विभाग ने अगस्त 2007 में लघु उद्योग निगम के माध्यम से आला अफसरों के लिए लेनोवो कंपनी के 76 लैपटाप खरीदे थे। इन्हें भोपाल की माईल स्टोन कम्प्यूटर और लेटेस्ट डिवाइसेस ने सप्लाई किया। बताया जाता है कि निर्माता कंपनी और उसके इन डीलर्स को वाय 300 माडल के लैपटाप देने थे।
इसके साथ ही पेन ड्राइव,प्रोसेसर,एथरनेट स्पीड,आपरेटिंग सिस्टम आदि भी मांगे थे,लेकिन मजेदार बात तो यह है कि मुख्य सचिव से लेकर अन्य प्रमुख सचिवों तक के लिए खरीदे गए लैपटाप और उसका अन्य सामान भी निर्धारित मापदंड का सप्लाई नहीं हुआ।
प्रमुख सचिव ने जांच के आदेश दिए:
इस बात की शिकायत मिलने पर प्रमुख सचिव वाणिज्य एवं उद्योग सत्यप्रकाश ने जांच के आदेश दिए। इस पर जब निगम प्रबंधन ने लेनोवा इंडिया प्रा. लि को पत्र लिखकर यह जानना चाहा कि मांगे गए माडल से भिन्न माडल क्यों सप्लाई हुआ तो कंपनी ने इसका जवाब देने के बजाय कुछ और उत्तर भेज दिया।
इसके बावजूद निगम प्रबंधन कंपनी को कालीसूची में डालने के बजाय सहानुभूतिपूर्वक विचार कर रहा है। इतना ही नहीं उसका रवैया कंपनी की रोकी गई विपणन सुविधा फिर से बहाल करने संकेत देता है। इससे निगम प्रबंधन की भूमिका भी संदिग्ध जान पड़ती है। निगम के मार्केटिंग विभाग के अफसर बचाव में बचकाने तर्क देते है। वे कभी इस लैपटाप की विशेषता बताते है तो कभी मामूली कमी मानते हैं। मगर जानकारों का कहना है कि एक लैपटाप की खरीदी में लगभग सत्रह से बीस हजार का घपला हुआ है।
सप्लाई बंद और चालू करने का खेल
टेंडर में लिखे गए लैपटाप से भिन्न सप्लाई करने के मुद्दे पर निगम प्रबंधन पिछले तीन महीने से कोई निर्णय नहीं ले पा रहा है। इस दौरान दो मर्तबा वह लेनोवो कंपनी से खरीदी बंद कर चालू कर चुका है। तकनीकी समिति ने इस मामले में लीपापोती कर लगभग लैपटाप की मूल कीमत और लेनोवा को दी गई कीमत में सत्रह सौ रुपए का अंतर निकाला है। यह राशि जमा कराकर निगम फिर से सप्लाई चालू करने की फिराक में है।
लैपटाप की कीमत के घोटाले को इस तरह समझा जा सकता है। सप्लाई किए गए प्रति लैपटाप का उस समय बाजार मूल्य अधिकतम 35 हजार रुपया था। जबकि सप्लाई किए गए लैपटाप अधिकतम 55 हजार रुपए तक के थे।
टेंडर से भिन्न माडल सप्लाई करने के मामले में कंपनी और उसके डीलर्स के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उन्हें कम से कम एक साल तक सप्लाई आर्डर नहीं दिए जाएंगे।
-एसके मिश्रा, प्रबंध संचालक मप्र लघु उद्योग निगम
मंत्रालय में सप्लाई हुए कंपनी के लैपटाप की मुझे कोई जानकारी नहीं है। यह खरीदी मेरे कंपनी में आने के पहले की है। हमने लघु उद्योग निगम को अपना जवाब भेज दिया है। सप्लाई में गड़बड़ी करने वाले डीलर के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
-गिरीश साहनी, सेल्स स्पेशलिस्ट, गवर्नमेंट सेल लेनोवो इंडिया प्रा. लिमिटेड