भोपाल. राज्य के पुराने प्राइवेट हायर सेकंडरी तथा हाईस्कूलों के लिए खुली जमीन की अनिवार्यता समाप्त कर दी गई है, किंतु नए स्कूलों के लिए यह नियम लागू रहेगा। माध्यमिक शिक्षा मंडल ने मान्यता संबंधी नियमों में यह प्रावधान किया है। जिस पर निजी स्कूलों के एक संगठन ने एतराज जताया है। इस बीच मंडल ने अब तक राजधानी के लगभग 21 स्कूलों सहित प्रदेश के करीब 1100 स्कूलों को मान्यता प्रदान कर दी है।
मंडल की मान्यता समिति ने दिसंबर, 07 में जमीन के नए नियम तय किए थे। जिसके अनुसार शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों के लिए खेल मैदान की क्रमश: आधा एवं एक एकड़ जमीन के अतिरिक्त छह हजार वर्ग फीट खुली भूमि होना अनिवार्य किया गया था। बाद में मंडल के सचिव डीडी अग्रवाल ने इस नियम को पुराने स्कूलों के लिए अव्यावहारिक मानते हुए उन्हें सशर्त मान्यता जारी करने की प्रक्रिया शुरू कर दी। जबकि नई मान्यता के लिए आवेदन करने वाले स्कूलों के लिए अतिरिक्त जमीन अनिवार्य रखी गई है। इस मापदंड को पूरा न करने वाले अनेक स्कूलों को नोटिस भी जारी कर दिए गए हैं।
पहली बार :
इस वर्ष मान्यता के प्रकरण तेजी से निपटाए जा रहे हैं। संभवत: ऐसा पहली बार हुआ है कि मार्च महीने में ही मान्यता से संबंधित एक चौथाई काम पूरा कर लिया गया। वजह यह कि इस साल मान्यता का काम फरवरी में ही शुरू कर दिया गया था। इसके पहले तक ऐसे मौके भी आए हैं जब मंडल शिक्षा सत्र शुरू होने के बाद भी मान्यता के मामले न निपटा पाया हो।
अब तक 22 :
इस वर्ष राज्य के केवल 22 जिलों से ही अब तक मान्यता के संबंध में कलेक्टर की रिपोर्ट आई है। इस रिपोर्ट के आधार पर ही मान्यता का फैसला होता है। शेष जिलों से जल्दी रिपोर्ट भेजने को कहा गया है।
किसका, क्या कहना-
मान्यता की प्रक्रिया चल रही है। पुराने स्कूलों को सशर्त मान्यता दे रहे हैं, वहीं नए स्कूलों के मामले में खुली भूमि का बंधन सख्ती से लागू है।
- डीडी अग्रवाल, सचिव, माध्यमिक शिक्षा मंडल
पुराने स्कूलों पर खुली भूमि का नियम लादना गलत है। पूर्व में मंडल ने अधिकतर स्कूलों को नोटिस दे दिए। अब उन्हें राहत दी है, तो उनके प्रमाण-पत्र जल्दी दिए जाने चाहिए।
- सुरेंद्रसिंह बघेल, अध्यक्ष, अशासकीय विद्यालय संगठन