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टोली संग आई होली

जयपुर. holifसौ वर्ष में पहली बार शुक्रवार को संयोग बन रहा है कि होली, बारावफात व गुड फ्राइडे, ये तीन धर्मो के तीन त्योहार एक ही दिन मनाए जाएंगे। इस दिन से शक संवत 1930 की शुरुआत का भी अद्भुत संयोग होगा।

होली पर हिंदू जहां प्रेम की गुलाल उड़ाएंगे, वहीं मुस्लिम बारावफात पर हजरत मोहम्मद के उपदेशों को याद करेंगे, जबकि ईसाई प्रभु यीशु के बलिदान को याद करेंगे। इसके अलावा शुक्रवार को ही चैतन्य महाप्रभु जयंती है। जैन समुदाय का अष्टाह्न्कि ओली व्रत भी इस दिन पूर्ण होगा।

रंग व उमंग से सराबोर होली का त्योहार शुक्रवार को मनाया जाएगा। शाम को गोधूलि बेला में होलिका दहन होगा। रात भर युवाओं की टोलियां किक्रेट व फाग उत्सवों में मस्त रहेंगी। अगले दिन शनिवार को धूलंडी मनाई जाएगी। गुलाबी नगर के गली-मोहल्लों में फाल्गुन के गीत गूंज रहे हैं। हाथों में रंग-गुलाल लिए नन्हे मस्तानों की टोलियों ने घरों में दस्तक देनी शुरू कर दी है।

होली की पूर्व संध्या पर कहीं ढप तो कहीं चंग की थाप पर लोग थिरकते नजर आए तो कहीं फाग के गीतों पर लोगों ने ताल से ताल मिलाई। राजापार्क, मानसरोवर व मालवीय नगर के बाजारों में भी देर रात तक चहल-पहल रही। चारदीवारी में शुक्रवार को होलिका दहन परंपरागत रूप से होगा। लोग सिटी पैलेस के बाहर होली से अग्नि लाकर अपने-अपने चौराहों पर होलिका दहन करेंगे। इसके बाद ठंडाई व भंग का दौर देर रात तक चलता रहेगा। दूसरे दिन बच्चे, बड़े व बुजुर्ग रंगों की मस्ती के बीच घिरे रहेंगे।

गुलाल व रंग की महक

होली की पूर्व संध्या पर बाजारों में रौनक नजर आई। किसी को रंग व गुलाल खरीदना था तो किसी को मिठाई व पूजा सामग्री की चिंता थीं। चारदीवारी के बड़ी चौपड़, त्रिपोलिया बाजार, छोटी चौपड़ व चांदपोल बाजार में रंग व गुलाल की दुकानों पर भीड़ नजर आई। परंपरागत इत्र मिश्रित अरारोट गुलाल और अबीर मिश्रित चमकीली गुलाल अधिक पसंद की जा रही है। रंग के हिसाब से केसरिया, पीली पर्पल, फ्लोरोसेंट तथा गुलाबी गुलाल ज्यादा बिक रही है।

भक्त व भगवान भी खेलेंगे होली

होली पर गोविंददेवजी व गोपीनाथजी मंदिर सहित विभिन्न मंदिरों में भक्त भी ठाकुरजी के संग होली खेलने का आनंद लेंगे। गोविंददेवजी मंदिर में शुक्रवार को राजभोग आरती के बाद महंत परिवार की ओर से ठाकुरजी को गुलाल अर्पित की जाएगी। इसके बाद भक्त व भगवान के बीच होली खेलने का दौर शुरू होगा। शाम को गौरांग महाप्रभु जयंती उत्सव का शुभारंभ होगा, जो दो माह तक चलेगा।

याद आती है फाग की सवारी

रियासतकाल में होली पर सिरहड्योढ़ी बाजार से महाराजा की फाग की सवारी हाथियों के लवाजमे के साथ निकलती थी, जो बाजारों से गुजरती थी। हाथियों के दोनों ओर पखारे गुलाल गोटों से भरी होती थीं। महाराजा के साथ चल रही विशाल पिचकारियां लोगों को रंगों से सराबोर कर देती थीं।





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