जयपुर. फलों से जूस, पाउडर बनाने और सब्जियों का खुदरा व्यापार करने के लिए बड़ी कंपनियों को अब अलग-अलग मंडियों में लाइसेंस लेने की जरूरत नहीं रहेगी। वे एक ही लाइसेंस पर राज्यभर में कहीं भी खरीद कर सकेंगी।
राजस्थान विधानसभा ने गुरुवार को राजस्थान कृषि उपज मंडी (संशोधन) विधेयक 2008 पारित कर दिया। नगर निगमों के महापौर और उप महापौर भी अब लोक सेवक माने जाएंगे। भ्रष्टाचार संबंधी शिकायतों के मामले में अब लोकायुक्त इनकी जांच कर सकेंगे और सरकार को कार्रवाई करने के लिए सुझाव दे सकेंगे। राजस्थान विधानसभा ने गुरुवार को राजस्थान लोकायुक्त तथा उप लोकायुक्त संशोधन विधेयक 2008 को ध्वनिमत से पारित कर दिया।
कृषि मंडी अधिनियम में संशोधन :
राजस्थान कृषि उपज मंडी संशोधन विधेयक 2008 में नई धारा (14 क) जोड़ी गई है। इसमें व्यापारियों और प्रसंस्करणकर्ताओं को एक से अधिक मंडी के लिए लाइसेंस जारी करने प्रावधान किया गया है। धारा 14 ख में मंडी निदेशक को यह अधिकार दिया गया है कि वह लाइसेंस शर्तो के उल्लंघन अथवा अन्य कारणों से लाइसेंस को निरस्त भी कर सकेगा। लोकायुक्त-उप लोकायुक्त संशोधन के तहत जिला परिषदों के जिला प्रमुख, उप जिला प्रमुख और पंचायत समिति के प्रधान और उप प्रधान को भी लोक सेवक की श्रेणी में लिया गया है। इनके खिलाफ भी लोकायुक्त भ्रष्टाचार की जांच कर सकेंगे।
विधानसभा 24 तक स्थगित
होली के अवकाश के कारण विधानसभा की कार्यवाही 24 मार्च तक स्थगित रहेगी। 25 मार्च को सुबह 11 बजे से विधानसभा की कार्रवाई तय कार्यक्रम के अनुसार होगी।