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हंगामे के बीच धर्म स्वातंत्र्य बिल पास

जयपुर.sabhराज्य विधानसभा में गुरुवार को धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2008 पर चर्चा के दौरान कानून मंत्री की पूर्व राज्यपाल पर टिप्पणी को लेकर विपक्ष के सदस्यों ने आधे घंटे तक जमकर हंगामा किया। इसके बाद वे वॉकआउट कर गए और सदन ने धर्म स्वातंत्र्य बिल पारित कर दिया।

विधेयक पर बहस का जवाब देते समय गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया जब 2006 में पारित धर्म स्वातं˜य विधेयक के बारे में तत्कालीन राज्यपाल की कार्यशैली के बारे में बता रहे थे, तो विपक्ष के माहिर आजाद व हरिमोहन शर्मा ने एतराज जताया। उनका कहना था कि सदन में राज्यपाल और राष्ट्रपति के किसी भी आचरण पर टिप्पणी नहीं की जा सकती। इसी दौरान कानून मंत्री घनश्याम तिवाड़ी ने यह कहकर उत्तेजना फैला दी कि ‘राज्यपाल के यहां जो हुआ गलत हुआ’। इस पर विपक्ष के सदस्यों ने पहले वैल में और फिर आसन के सामने नारेबाजी की। आधा घंटे बाद विपक्ष के सदस्य बाहर चले गए।

इससे पहले बहस में कांग्रेस के बीडी कल्ला ने जानना चाहा कि राज्य में कितनी बार धर्मातरण की वजह से कानून-व्यवस्था बिगड़ी है? कानून की धाराओं को गैर-जमानती बनाकर समुदाय विशेष को भयभीत किया जा रहा है। भाजपा के जोगेश्वर गर्ग ने बताया कि लोग धर्म बदलकर आरक्षण का लाभ लेना चाहते हैं, उसको रोकने के लिए भी इस कानून में प्रावधान होना चाहिए।

सुभाष बहेड़िया का कहना था कि यह कानून किसी को भी स्वेच्छा से कोई भी धर्म अपनाने से नहीं रोकता। कांग्रेस के हरिमोहन शर्मा का कहना था कि सरकार यह विधेयक लाकर धर्म को बांटना चाहती है। एक ही उद्देश्य के लिए दुबारा विधेयक लाना असंवैधानिक है। जुबेर खान ने कहा कि सभी धर्र्मो के उद्देश्य समान हैं तो कानून बनाने की जरूरत नहीं है। सरकार इस विधेयक के माध्यम से अल्पसंख्यकों को परेशान करना चाहती है।

डा.सीपी जोशी ने कहा कि अनुच्छेद 25 के प्रावधानों का उल्लंघन है। दुबारा विधेयक लाकर सरकार सर्वोच्च पद पर बैठी महिला का अपमान करना संसदीय परंपराओं के खिलाफ है। कांग्रेस के संयम लोढ़ा ने कहा कि हजारों साल पुराने हिंदू धर्म को बचाने के लिए आज तक किसी कानून की जरूरत नहीं पड़ी। यह कानून बनाने के बजाय हम छुआछूत, जात-पांत जैसी सामाजिक बुराइयों को दूर करते, तो बेहतर होता।

क्या है विधेयक :

विधेयक के प्रावधानों के अनुसार किसी प्रलोभन (नकद, वस्तु या फायदे के रूप में), सामाजिक बहिष्कार, बल प्रदर्शन या कपटपूर्ण आचरण अपनाकर कोई भी धर्म परिवर्तन नहीं करा सकता। इसका उल्लंघन करने पर गैर-जमानती धाराओं में मुकदमा दर्ज किया जाएगा।

राज्यपाल की मंजूरी के बाद क्या होगा:

-प्रलोभन या छल कपट से धर्म परिवर्तन नहीं कराया जा सकेगा।
-इसका उल्लंघन करने पर एक से तीन साल की सजा, 25 हजार तक जुर्माना।
-नाबालिग, महिला या अजा-जजा के मामलों में दो से पांच साल की सजा, 50 हजार रुपए जुर्माना।
-कोई संस्था या ट्रस्ट ऐसा काम करता पाया गया तो उसका रजिस्ट्रेशन रद्द।
-स्वेच्छा से धर्म परिवर्तन करने की सूचना कलेक्टर को एक महीने पहले देनी होगी।
-अपराध संज्ञेय व गैर-जमानती होगा।
-अभियोजन की मंजूरी कलेक्टर या एसडीएम स्तर का अधिकारी देगा।





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