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‘सेव सरबजीत’ अप्रैल से

चंडीगढ़सरबजीत सिंह की रिहाई का मसला यूएनओ और एमनेस्टी इंटरनेशनल तक पहुंच गया है। इस सिलसिले में चंडीगढ़ ग्लोबल ह्यूमन राइट काउंसिल के चेयरमैन एडवोकेट अरविंद ठाकुर और सरबजीत सिंह की बेटी स्वप्नदीप कौर ने सेक्टर-44 स्थित ग्लोबल ह्यूमन राइट हाउस में यूएनओ और एमनेस्टी इंटरनेशनल को एक रिप्रेजेंटेशन भेजा है।

रिप्रेजेंटेशन में कहा गया है कि जब दुनिया के विभिन्न देशों में फांसी की सजा को समाप्त किया जा चुका है तो भारत और पाकिस्तान में भी फांसी की सजा समाप्त की जानी चाहिए। इस मौके पर सरबजीत सिंह की बेटी स्वप्नदीप कौर ने कहा कि पिछले एक महीने में ग्लोबल ह्यूमन राइट काउंसिल ने हमारी काफी मदद की है और पहली बार उनके पिता की रिहाई को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आवाज उठाई गई है।

स्वप्नदीप ने यह भी कहा कि उनके पिता सरबजीत को फांसी की सजा में दी गई 30 अप्रैल तक की छूट से उनका परिवार राहत महसूस कर रहा है। पाकिस्तान सरकार द्वारा दी गई छूट से देशभर के शुभचिंतकों में भी उनके पिता की रिहाई को लेकर उम्मीदें बनी हैं।

सेव सरबजीत कैंपेन अप्रैल से :

चंडीगढ़ ग्लोबल ह्यूमन राइट्स काउंसिल सरबजीत सिंह की पाकिस्तान की जेल से जल्द रिहाई को लेकर अप्रैल के पहले सप्ताह से सेव सरबजीत कैंपेन की शरुआत करने जा रहा है। काउंसिल के चेयरमैन अरविंद ठाकुर ने बताया कि कैंपेन के तहत जगह-जगह पर कैंडल मार्च प्रोसेशन किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि यह कैंपेन सरबजीत के परिवार के साथ मिलकर किया जाएगा, जो चंडीगढ़ से शुरू होकर पूरे देश में चलाया जाएगा।

हमारे पापा बेकसूर : स्वप्नदीप :

सरबजीत की बेटी स्वप्नदीप कौर ने भास्कर से बातचीत में कहा कि उनके पापा इन्नोसेंट हैं। उन पर लगे आरोप बेबुनियाद हैं।

स्वपनदीप कौर ने कहा कि उनके पिता को सजा में मिली एक माह की मोहलत का फायदा उठाते हुए भारत सरकार को रिहाई को लेकर ठोस कदम उठाने चाहिए।

स्वप्नदीप ने कहा कि पाक की अदालत में उसके पिता पर लगाए गए आरोपों से बचाने के लिए अब तक हुई 122 पेशियों में से करीब 63 पेशियों में कोई वकील ही नहीं था जो यह साबित कर सकता कि यह सरबजीत सिंह ही है। हम इस मामले की दोबारा से छानबीन चाहते हैं। स्वप्नदीप ने यह भी कहा कि उनका परिवार खुद पाकिस्तान जाकर सारे मामले का खुलासा करना चाहता है। इसके लिए उन्होंने वीजा के लिए भी आवेदन किया है।





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