जयपुर.शुक्र ग्रह के मई में अस्त होने व जुलाई में उदित होने की तिथि पर मतभेद के कारण जुलाई में विवाह योग को लेकर भ्रम पैदा हो गया है। विभिन्न पंचांगों में शुक्र के उदय-अस्त की तिथियों में दस दिन तक का अंतर होने से विवाह आयोजनों को लेकर लोग पसोपेश में हैं।
गणना जयपुर या उज्जैन से :
पं. बंशीधर जयपुर पंचांग के निर्माता पं. दामोदर प्रसाद शर्मा शुक्र के उदय व अस्त की गणना के लिए ज्योतिष गणित की उन्नतांश पद्धति को अचूक बताते हैं। उन्होंने इसी पद्धति के अनुसार जयपुर की अक्षांश 27 डिग्री की स्थिति को ध्यान में रखते हुए गणना की है। इसलिए जयपुर के संदर्भ में उनके पंचांग की गणना सही है। उधर, सम्राट पंचांग के संपादक पं. रवि शर्मा ने भारत के केंद्रीय स्थल उज्जैन की 23 डिग्री अक्षांश स्थिति को ध्यान में रखकर गणना की है।
राजस्थान की स्थिति :
पं. रवि शर्मा ने बताया कि राजस्थान में 23 डिग्री अक्षांश के आसपास के लोहारिया, पीपलोदा, डूंगरपुर, उदयपुर व बांसवाड़ा जैसे शहरों में विवाह हो सकेंगे। जयपुर में 13 जुलाई को शुक्रोदय के बावजूद इस माह में विवाह संबंध नहीं हो सकेंगे। यही स्थिति राज्य के अन्य स्थानों की है।
24 से 30 डिग्री अक्षांश के बीच स्थित राज्य : राजस्थान में दक्षिणी हिस्सों को छोड़कर अन्य भागों, उत्तरप्रदेश, झारखंड, असम, दिल्ली, हरियाणा व दक्षिण बिहार को छोड़कर राज्य के अन्य हिस्सों में विवाह योग नहीं है। यहां 12 जुलाई को शुक्र उदय होगा और इसके बाल्यत्व दोष की समाप्ति से पहले ही देवशयनी एकादशी के कारण विवाह योग समाप्त हो जाएंगे।
पंचांगों में शुक्र उदय-अस्त की भिन्न तिथियां :
पंचांग का नाम अस्त उदय
श्री बल्लभ मणिराम पंचांग 27 अप्रैल को रात 10:46 बजे 5 जुलाई को सुबह 4:56 बजे
पं. बंशीधर जयपुर पंचांग 6 मई को अपरान्ह 3:15 बजे 13 जुलाई को तड़के 3:40 बजे
जय विनोदी जयपुर पंचांग 6 मई को सुबह 5:17 बजे 12 जुलाई को सुबह 10:40 बजे
सम्राट पंचांग 5 मई को शाम 4:31 बजे 3 जुलाई को सुबह 7:40 बजे
अक्षांश के आधार पर राज्यों में स्थिति
10 डिग्री से 23 डिग्री अक्षांश के बीच स्थित राज्य : कर्नाटक, केरल, आंध्रप्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, मध्यप्रदेश, बिहार का दक्षिणी हिस्सा, बंगाल व छत्तीसगढ़ और दक्षिण राजस्थान में कुछ भागों में जुलाई में विवाह योग है। इन राज्यों में 8, 9, 11 व 12 जुलाई को विवाह मुहूर्त हैं। इसके बाद 14 जुलाई को देवशयनी एकादशी है।
30 डिग्री अक्षांश के ऊपर स्थित राज्य :
पंजाब, उत्तरांचल, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश में देवशयनी एकादशी के बाद शुक्र उदय होने से विवाह योग नहीं है।
शुक्र अस्त की तिथि को लेकर मतभेद नहीं होने चाहिए। जयपुर के संदर्भ में 13 जुलाई के पहले शुक्र उदय नहीं हो सकता। सही गणना की जाए तो देश के अन्य हिस्सों में भी इस तिथि में ज्यादा अंतर नहीं होगा।
-डॉ. विनोद शास्त्री, महासचिव, राजस्थान ज्योतिष परिषद