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Chhattisgarh
Raipur Raipur रायपुर. राजधानी में पहली बार रामकृष्ण केयर हास्पिटल में बिना हड्डियों को काटे हार्ट की सर्जरी की गई। अस्पताल के संचालक डा. संदीप दवे ने बताया कि आपेरशन करने वाले डाक्टरों की टीम में चीफ कंसल्टेंट कार्डिक सर्जन डा. देवेंद्र सिंह, डा. अंशुमन दरबारी और एनस्थिसिया विशेषज्ञ डा. मनीष शर्मा शामिल थे। उन्होंने बताया कि महिला को सांस लेने में तकलीफ थी।
तकलीफ बढ़ने पर उसे जगदलपुर रायपुर में जांच कराने की सलाह दी गई। चार दिन पहले महिला को गंभीर हालत में यहां भर्ती किया गया। डायग्नोसिस और इको टेस्ट से पता चला कि मरीज के हार्ट का वाल्व सिकुड़कर बंद हो गया था। जिसकी वजह से सांस लेने में तकलीफ हो रही थी।
डा. सिंह के नेतृत्व में डाक्टरों की चार सदसीय टीम आपरेशन किया। मरीज के दाहिने वक्ष के नीचे छेद कर हड्डियों को बिना नुकसान पहुंचाए खराब वाल्व को निकाला गया और उसकी जगह कृत्रिम (आर्टिफिशियल) वाल्व डालकर उसे जोड़ दिया गया।
कैसी बीमारी?
बचपन में जब किसी को गले में खरास और सांस की तकलीफ होने लगे तो उसे गंभीरता लेना चाहिए। कुछ मामलों में 15-20 साल बाद हार्ट के वाल्व सिकुड़ने लगते हैं। जिससे सांस लेने में तकलीफ होती है। खाना बनाते समय, दौड़ते समय और कुछ काम करने पर सांस सामान्य से अधिक फूलने लगती है। इसे रियूमेटिक माइट्रल स्टेनोसिस कहते हैं।
क्या है नई तकनीक
डा. सिंह ने बताया कि कृत्रिम वाल्व वाले इस आपरेशन को मिनीमली इन्वेसिव सर्जरी (एमआईएस) तकनीक कहा जाता है। इसकी खास बात यह है कि इसमें बिना हड्डियों को काटे वाल्व को शरीर के भीतर स्थापित किया जा सकता है। आपरेशन के बाद मरीज सप्ताहभर में ही सामान्य स्थिति में लौट सकता है।
वाल्व स्थापित करने के लिए इस पद्धति में 3-4 इंच का ही छेद करना पड़ता है। पुरानी पद्धति में 10-12 इंच का छेद करना पड़ता था। खासकर महिलाएं इस सर्जरी के बाद सामान्य जीवन व्यतीत कर सकती हैं। इससे मरीज को सप्ताहभर में ही आराम होने लगता है। उन्होंने न्यूजीलैंड में इसके आपरेशन किए हैं। राज्य में ऐसा पहली बार हुआ है।