News
Chhattisgarh
Raipur Raipur रायपुर.
पामेड़ के पास दो दिन पहले हुई मुठभेड़ में मारे गए 17 में से 10 माओवादियों की पहचान कर ली गई। ज्यादातर एरिया कमांडर स्तर के नक्सली थे। जंगल में पडपल्ली गांव के पास सोमवार की रात 137 नक्सली इकट्ठा हुए थे, जिनमें कई शीर्ष कमांडर थे। छत्तीसगढ़ की इंटेलिजेंस ने नक्सली नेता जनार्दन का एक संदेश पकड़ा है, जिसके मुताबिक 20 और माओवादी घायल हुए हैं।
पुलिस का अनुमान है कि गंभीर घायलों में शीर्ष नेता आयतू और गणोश के अलावा सूयर्म और कन्नम्मा भी हैं। आंध्रप्रदेश के गुप्तचर इस सूचना की सच्चई जानने में जुट गए हैं। इंटेलिजेंस ने बस्तर और आंध्रप्रदेश के ग्रामीणों से नक्सलियों के शवों की पहचान कराई है। मारे गए नक्सलियों में खम्मम डिवीजनल कमेटी का सचिव माटुरी यादगिरी उर्फ सागर (45) और उसकी बेटी तथा डिप्टी कमांडर वेन्नला (23) भी है। यादगिरी 20 साल से सक्रिय था।
वेन्नला ने तीन साल पहले नक्सलियों को ज्वाइन किया। वह ग्रेजुएट तथा कंप्यूटर की जानकार थी। इनके अलावा मारे गए दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी के कमांडर भास्कर और मिलेट्री कमीशन के प्लाटून कमांडर हूंगा की गिनती भी खूंखार नक्सलियों में होती है। मारे गए अन्य नक्सलियों में एरिया कमांडर रघु, कैडर एरिया कमांडर जुम्पी, एरिया कमांडर माले, एरिया कमांडर मड़काम, डिप्टी कमांडर आयतू (दूसरा) और मयूरी वेन्नर शामिल हैं।
खीर में मिलाया जहर : इंटेलिजेंस ने नक्सल नेता वरवर राव का भी संदेश पकड़ा है, जिसमें उसने दावा किया कि सलवा जुड़ूम से जुड़े लोगों ने उस विवाह समारोह में बांटी गई खीर (सेमिया) में जहर मिलवाया था, जो सबको परोसी गई।
जिस व्यक्ति ने खीर में जहर मिलाया, उसे इस काम के पैसे भी दिए गए। जब नक्सली जहर की वजह से मदहोश होने लगे, तब ग्रे हाउंड ने धुआंधार फायरिंग की। घिरे हुए नक्सलियों को अपने 8 प्रमुख नेताओं के शव छोड़ने पड़े। किसी तरह 20 घायलों को लेकर वे भागे। इस संदेश में एनकाउंटर को ‘विष काउंटर’ लिखा गया है। वैसे, छत्तीसगढ़ पुलिस इस मामले में चुप है।
बुर्के में करेंगे पहचान : बचे हुए नक्सलियों के शवों की पहचान के लिए लोग आगे नहीं आ रहे हैं। बस्तर के अफसरों ने पुलिस मुख्यालय को इस स्थिति से अवगत कराया था। यहां से निर्देश भेजे गए हैं कि पहचान करनेवालों को बुर्के में लाया जाए। माना जा रहा है कि जो लोग पहचान करने पहुंच रहे हैं, हो सकता है कि नक्सलियों की उनपर नजर हो।
यादगिरी व पुत्री का शव परिजन ले गए
हमारे जगदलपुर और कोंटा कार्यालयों के अनुसार मारे गए माओवादी एम यादगिरी की पत्नी एम रामतारा पति और बेटी का शव लेने आंध्रप्रदेश से आज कोंटा पहुंची। उसके साथ दो भाई सीदैया और बाला नरसैया भी थे। रामतारा ने बताया कि मयूरी कालेज की पढ़ाई के दौरान अचानक गायब हो गई। उसकी बहन अब भी वारंगल के कालेज में पढ़ रही है।
बहरहाल, मुठभेड़ के विरोध में नक्सलियों ने 31 मार्च को दंडकारण्य बंद का आह्वान किया है। दंडकारण्य जोनल कमेटी के सचिव कोसा के दस्तखत से जारी इस आशय के पर्चे सीमावर्ती आंध्रप्रदेश में लगे हैं, जिनमें कहा गया कि मुठभेड़ में भास्कर, हूंगा, रघु और छोटे के अलावा महिला नक्सली नेता मल्लै मारी गई हैं तथा कमांडर लखमा को पुलिस उठाकर ले गई है।
तीन ग्रामीणों की हत्या
माओवादियों ने मंगलवार की रात माटवाड़ा के जिन तीन ग्रामीणों मड़कामी बोड़ा (40), माड़वी हिड़का (25) तथा मड़कामी देवा (24) को अगवा किया था, उनके शव कोतरापाल मार्ग पर नाले के किनारे मिले। बस्तर आईजी आरके विज ने बताया कि मारे गए तीनों ग्रामीण सलवा जुड़ूम की शुरुवात के बाद से ही अपना गांव मोदापाल छोड़कर माटवाड़ा राहत शिविर में रह रहे थे।