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Bilaspur Bilaspur बिलासपुर.
रंगों के तालमेल से भरे अनूठे सामाजिक पर्व होली पर लोग एक-दूसरे को रंगने के लिए बेताब हैं। हंसना-हंसाना, हुड़दंग-हंगामा, उत्साह व उमंग के साथ प्रेम और भाईचारे के रंग में बच्चे, बूढ़े, जवान, आदमी-औरत और अमीर-गरीब भेदभाव को भूलकर सिर्फ होली के उल्लास में खो जाएंगे। गुड फ्राइडे और ईद ने इस बार होली के उत्साह को ‘तीन गुना’ कर दिया है। फागुनी मस्ती पूरे शबाब पर होगी, जब शुक्रवार की रात सैकड़ों स्थानों पर होलिका जलाई जाएगी।
रंगों के त्योहार होली के लिए शहर के साथ समूचा अंचल मस्ती व जोशो-खरोश से तैयार है। होली के हुड़दंग की शुरुआत 21 मार्च की रात से ही हो जाएगी। इस दिन शाम ढलते ही होलिका दहन की तैयारी शुरू कर दी जाएगी।
युवाओं ने बड़े पैमाने पर लकड़ियां जुटाकर बड़ी और बच्चों ने छोटी होलिका तैयार कर ली है। माना जाता है कि ‘होलिका’ में लकड़ियों के रूप में होली पर बुराइयों का दहन होता है। इसके लिए मुहूर्त का भी खास ख्याल रखा जाता है।
ज्योतिष एवं वास्तुविद् पं. दीपक शर्मा के अनुसार 21 मार्च को पूर्णिमा की रात में 9.54 बजे से 11 बजे के बीच होलिका दहन का शुभ मुहूर्त है। दूसरे दिन होली और 23 मार्च को भाई दूज का पर्व मनाया जाएगा। पं. शर्मा का कहना है कि होली पर प्राकृतिक रंग यानी गुलाल, अबीर का प्रयोग करना चाहिए। इसका भी ज्योतिषीय महत्व है। माना जाता है कि इससे नवग्रहों की कृपा प्राप्त होती है, क्योंकि नवग्रह का रंगों से खास संबंध होता है।
क्या है होलिका दहन की विधि
होलिका स्थापना के पूर्व स्थल को पानी से शुद्ध करें। दूब या फूल से गंगा जल का छिड़काव करने के बाद हल्दी कुमकुम, चावल, तिल और ऋतु फल होलिका को अर्पित करें। परिक्रमा के बाद बताशे और पंचमेवा चढ़ाकर कुंवारी कन्या के हाथों होलिका में अग्नि प्रज्जवलित करें।