नई दिल्ली: प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने उच्च शिक्षा में क्षेत्रीय असंतुलन दूर करने के लिए तेजी से कदम उठाने पर जोर दिया है। पीएमओ ने हाल ही में इस संबंध में मानव संसाधन मंत्रालय सहित अन्य को सूचित किया है।
मंत्रालय के उच्च पदस्थ सूत्रों का कहना है कि दसवीं योजना के दौरान दक्षिण के राज्यों में उच्च शिक्षा से संबंधित कालेजों की तेजी से बढ़ी संख्या ने उत्तरी राज्यों को काफी पीछे छोड़ दिया है। गांव और शहर की खाई भी काफी गहरी है और मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक सामान्य शिक्षा से जुड़े 60 फीसदी संस्थान और तकनीकी शिक्षा के 80 प्रतिशत कालेज शहरी क्षेत्रों में स्थित हैं।
एक उच्च अधिकारी के मुताबिक पीएमओ के साथ चर्चा में यह मुद्दा बार -बार उठा है। 11वीं योजना में इस अंतर को पाटने की मुहिम तेजी से शुरु करने के लिए संबंधित एजेंसियों यूजीसी, एआईसीटीई और राज्यों को चेताया गया है।
महाराष्ट्र,आंध्र,तमिलनाडु पहले तीनवर्ष 2002०3 से 2006०7 के दौरान महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा ७३२ नए कॉलेज खुले। मध्यप्रदेश, यूपी, राजस्थान जैसे राज्यों में इनकी संख्या काफी कम है।
संतुलन बनाने की योजनामानव संसाधन मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि उच्च शिक्षण संस्थान खोलने के लिए गांव और शहर की बजाए आधारभूत ढांचे की उपलब्धता देखी जाती रही है, लेकिन अंतर पाटने के लिए 11वीं योजना में हर इलाके के साथ संतुलन साधने की योजना बनाई गई है, इस पर तेजी से अमल करने का प्रयास शुरु हो गया है।