नई दिल्ली: वामपंथी दल अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) के साथ भारत केंद्रित सुरक्षा उपायों संबंधी मसौदे को एजेंसी के बोर्ड के समक्ष पेश करने की अनुमति दे सकते हैं। ऐसा हुआ तो इसका अर्थ होगा कि वाम दलों को मसौदा मंजूर है। बोर्ड की मंजूरी के बाद ही मसौदा समझौते की शक्ल लेगा। बोर्ड की बैठक मई के पहले पखवाड़े में होने की संभावना है।
रणनीतिकारों का तर्क : यूपीए के शीर्ष नेतृत्व ने संकेत दिए हैं वाम दल मसौदे को आईएईए के बोर्ड में भेजने पर सहमत हो सकते हैं। वामदलों को मनाने में लगे सरकार के रणनीतिकारों का तर्क है कि आईएईए बोर्ड में स्थिति साफ नहीं है। हो सकता है कि वह समझौते को खारिज कर दे।
कई परीक्षाएं शेष : बोर्ड ने यदि मंजूरी दी भी, तो समझौते को एनएसजी की परीक्षा पास करनी होगी। उसके बाद अमेरिकी कांग्रेस में अंतिम परीक्षा पास होने के बाद भारत सरकार के दस्तखत होने पर ही करार को अमल में लाया जा सकेगा। अंतिम मंजूरी को लेकर वामदलों ने अब तक कोई स्पष्ट आश्वासन नहीं दिया है। हालांकि रणनीतिकारों के मुताबिक वामदलों ने इसे खारिज भी नहीं किया है।