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Chandigarh Chandigarh झुरहेडी गांव (मोहाली).
सर्वमीत दस साल पहले अपना परिवार छोड़ जीरकपुर चला गया था, अलग रहने। अरसे बाद शुक्रवार को वह अचानक गांव लौटा, परिवार से मिलने। घरवाले कहते हैं, इसकी वजह एकाएक उमड़ा प्यार नहीं, बल्कि बाप के हाथ लगने वाला खजाना है। मोहाली एअरपोर्ट के लिए ली गई उसकी जमीन के एवज में उसे सरकार से मोटी रकम मिलने वाली है। सर्वमीत इस पर हक भी जताता है।
चूल्हे की कालिख से काली हुईं दीवारों और बिना प्लास्टर वाले मकान में खाट पर बैठा आठवीं में पढ़ने वाला अमरिंदर जिद्द ठाने है कि घर में बीएमडब्ल्यू कार आनी चाहिए। उसने इसकी कीमत भी पता कर ली है। बेबाकी से कहता है कि ‘पापा को 21 करोड़ मिलेगा..बीएमडबल्यू तो 35 लाख की है.कौन बहुत मंहगी है.।’
लंबरदार प्रीतम सिंह कहते हैं ‘मारुति तो मेरे पास है, मुझे तो हैलिकॉप्टर दिलवा दो, कहां से मिलेगा?’ लेकिन प्रेम सिंह कुछ उदास हैं। जरा-से फासले से वह करोड़पति बनते-बनते रह गया। मायूसी से कहते हैं ‘सब कर्मो के सौदे हैं.।’ जसबिंदर का हाल ये है कि काटो तो खून नहीं, अक्ल पर पत्थर पड़ गए थे, तीन महीने पहले ही उसने अपनी जमीन बेच दी।
उसकी जमीन ने सोना नहीं उगला। मोहाली से दस किलोमीटर दूर गांव झुरहेड़ी में एकाएक बैंकर्स, प्रॉपट्री डीलर्स, मीडिया की चहल-पहल बढ़ गई है। रात-रात यहां जश्न हो रहा है। वजह, इंटरनेशनल हवाई अड्डे केलिए एक्वायर 306 एकड़ जमीन के बदले डेढ़ करोड़ प्रति एकड़ के हिसाब से मिलने वाला मुआवजा है। गांव के 161 घरों में से 45 घर जल्द ही करोड़पति हो जाएंगे। बाकी घरों में निराशा है।
इस गांव की माली हालत जैसे-तैसे गुजारे वाली है। कच्ची गलियां, खुली नालियां, गंदे मकान। खेतिहर जमीन पर कुछ अपने खाने व कुछ बेचने के लिए गेंहू उगाया जा रहा है और चावल लगाने लायक पानी नहीं है। ज्यादातर गांववालों का गुजारा दूध बेचकर हो रहा है। लेकिन अब उनकी दुश्वारियां दूर होने वाली हैं। गांववाले ऐशो-आराम की जिंदगी और स्कॉडा-बीएमडबल्यू कार के सपने देखने लगे हैं। किसी को चंडीगढ़ में 70 लाख तक का फ्लैट चाहिए तो कोई मुआवजे की रकम से प्रॉपट्री का बिजनेस करने की सोच रहा है।
सरपंच प्रेम सिंह बताते हैं कि सब के सब कार के दीवाने हो गए हैं, हां महिलाएं जरूर कुछ समझदारी की बात करती हैं। हरबंस कौर के परिवार को मुआवजे में 18 करोड़ रुपए मिलेंगे। जिसमें से एक-एक भाई के हिस्से 3 करोड़ आएंगे। वह कहती है सबसे पहले तो हम लोग जमीन खरीदेंगे, फिर बच्चों की कार लेने की इच्छा है, बाकी पैसा बैंक में रखेंगे। जसवंत कौर कहती है कि ‘बहुत गरीबी कटी ऐ असीं.हुण पैसा देंखांगे.जिंदगी ही पाटे कपड़ेयां च कटती।’
जसवंत कौर भी पहले जमीन लेगी और फिर बच्चों की ख्वाइशें पूरी करेंगी। नरनैल सिंह को ढाई एकड़ जमीन के बदले 3 करोड़ 45 लाख रुपए मिलेंगे। कहते हैं कि मैं तो जमीन लेने केबाद बच्चों को चंडीगढ़ में एक फ्लैट लेकर दूंगा ताकि वह शहर की जिंदगी जी सकें और उनके पोते कॉन्वेंट स्कूल में पढ़ सकें। गांव के ज्यादातर लोग मुआवजे की रकम से दूसरे जिलों व राज्यों में जमीनें लेने की सोच रहे हैं, बचे रुपए से कार, फ्लैट लेंगे और बच्चों को बिजनेस करवाएंगे।
किस्मत बदली गांव कीगांव-झुरहेड़ी
आबादी-1400
कुल घर-161
वोट-582
मुआवजा मिलेगा :
45 घरों को
कुल जमीन-505 एकड़पहले एक्वायर -80 एकड़ अब एक्वायर -306 एकड़