कैथलगांव मूंदड़ी के ग्रामीण अब खुद ही पुरातत्ववेत्ताओं की जिम्मेदारी निभाएंगे। राज्य पुरातत्व विभाग बाकायदा उन्हें खुदाई का प्रशिक्षण देगा और मार्गदर्शन करता रहेगा। खुदाई की साइट होगी गांव में ही स्थित लव-कुश तीर्थ। जी हां, लव-कुश तीर्थ में आस्था रखने वालों के लिए यह एक अच्छी खबर है। राज्य पुरातत्व विभाग इस तीर्थ की खुदाई के लिए अब गांव वालों को अधिकृत करने जा रहा है।
यानी अब गांव मूंदड़ी के लोग खुद ही इस तीर्थ पर जीर्णाेद्धार का काम शुरू कर सकेंगे और वह भी बिना किसी रोकटोक के। यह खुलासा किया है कि राज्य पुरातत्व विभाग के डिप्टी डायरेक्टर डॉ. माधव आचार्य ने। शुक्रवार को पुरातत्व विभाग के एक दल ने डॉ. आचार्य के नेतृत्व में लव-कुश तीर्थ का दौरा किया। इस विरासत को देखकर पुरातत्ववेत्ताओं के दल को हैरत तो हुई ही साथ ही उन्होंने इसकी दुर्दशा पर अफसोस भी जाहिर किया।
प्रस्ताव भेजें, मिलेगी मंजूरी :
डॉ. माधव आचार्य ने गांव मूंदड़ी की पंचायत से वादा किया कि वे लव-कुश तीर्थ की खुद खुदाई का प्रस्ताव पास करके उनके पास भेजें। उसे मंजूरी दी जाएगी। विभाग के पुरातत्ववेत्ता तीर्थ पर आएंगे और ग्रामीणों को खुदाई का प्रशिक्षण देंगे। इसके बाद ग्रामीण खुद अपने हाथों से धीरे-धीरे तीर्थ पर खुदाई करेंगे। जिला प्रशासन की ओर से उन्हें कोई नहीं रोकेगा। उन्होंने इसे ‘कार सेवा प्रोजेक्ट’ का नाम दिया है।
जिम्मेदारी पुरातत्व विभाग की नहीं:
डिप्टी डायरेक्टर ने स्पष्ट किया कि तीर्थ के जीर्णाेद्धार की जिम्मेदारी पुरातत्व विभाग की कतई नहीं है। यह कार्य कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के अधीन आता है और बोर्ड ही यह काम करेगा। पुरातत्व विभाग कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के साथ विचार-विमर्श करके ही ग्रामीणों को खुदाई के लिए परमीशन देगा। इसके लिए पुरातत्व विभाग के पुरातत्ववेत्ता समय-समय पर ग्रामीणों को गाइड करते रहेंगे।
वित्तीय सहायता के लिए करेंगे सिफारिश:
डॉ. माधव आचार्य ने बताया कि पुरातत्व विभाग ग्रामीणों को हर प्रकार की तकनीकी मदद उपलब्ध कराएगा। वित्तीय सहायता के लिए सरकार से सिफारिश की जा सकती है।