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Bilaspur Bilaspur बिलासपुर.
होली पूरे भारतवर्ष में मनाई जाती है परन्तु इसके नाम अलग - अलग है। कुछ क्षेत्रों में तो नाम के साथ -साथ रंगों के इस त्यौहार को मनाने की रीति-रिवाज भी अन्य से जुदा हैं । उदाहरण के लिए उत्तर प्रदेश के बरसाने में मनाई जाने वाली विश्वविख्यात लठ्ठ मार होली । हिमाचल की बर्फीली होली भी कम प्रख्यात व रोमांचकारी नहीं है।
लठ्ठमार होली से भगवान कृष्ण की लीलाएं जुड़ी होने की मान्यता है। इसमें कृष्ण के गांव नंदगांव के युवक राधिकाजी के गांव बरसाने स्थित राधिकाजी मंदिर में ध्वजा चढ़ाने जाते हैं। बरसाने में प्रवेश की पावन बेला पर गांव की गोपियां नंदगांव के युवकों का स्वागत रंगों की बजाय लाठी से करती हैं। माना जाता है कि यह परंपरा भगवान कृष्ण ने नंदगांव से राधिकाजी के यहां जाकर होली खेलकर शुरू की थी तब से यह लगातार चली आ रही है। नंदगांव व बरसाना दोनों गांव वर्ष भर होली का बेसब्री से इंतजार करते हैं।
लठ्ठमार होली के समय नंदगांव का जो ग्वाला बरसाने की गोपि1यों के हत्थे चढ़ जाता है उसकी पहले तो गोपियां जमकर धुनाई करती हैं। बाद में साड़ी में साज-श्रंगार करके उनसे नृत्य करवाती हैं। दिलचस्प बात यह है कि यह सब उत्सव के रूप में होता है और देश-विदेश से लोग बरसाने की लठ्ठमार होली देखने राधिकाजी के गांव पहुंचते हैं। दूसरे दिन बरसाने के ग्वाला (युवक) नंदगांव में होली खेलने जाते हैं और वहां भी जमकर होली खेली जाती है। खैर, राजस्थान में माली जाति के पुरूष महिलाओं को रंग कर होली मनाते हैं जबकि महिलाएं कपड़े के हंटर अथवा डंडे से पुरुषों की प्रीति पिटाई करती हैं।
बर्फीली होली:
हिमालय प्रदेश के कुलु में बर्फ में रंग मिला कर होली खेली जाती है। इसलिए यह बर्फीली होली के रूप में विख्यात है। वहीं उत्तर भारत में रंगों की रंगत होली से लेकर रंगपंचमी तक रहती है। रंगपंचमी होली की भांति धूमधूम से मनाई जाती है। महाराष्ट्र में शिमगा व रंगपंचमी के नाम से होली मनाई जाती है वहीं गोवा में वसंतोत्सव शिगमो के नाम से रंगों का त्योहार मनाया जाता है।
गोवा के शिगमोत्सव का मुख्य आकर्षण सांस्कृतिक नाटक तथा परंपरागत परेड होती है। 1द्दपूवरेत्तर भारत के राज्य मणिपुर में होली छह दिन तक चलती है। इस अवधि के दौरान राज्य में लोग हषरेल्लास के साथ प्रख्यात मणिपुरी नृत्य करते हैं। जगह-जगह अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं। इसका श्रीगणोश फागुन सुद पूनम से होता है। मणिपुर में झोपड़ी के आकार में लकड़ी का ढेर एकत्रित करके होलिका दहन किया जाता है ।
शोभा यात्रा के रूप में होली:
बंगाल में ‘डोल जात्रा’ अथवा ‘डोल पूर्णिमा’ के नाम से रंग व भाईचारे का त्योहार मनाया जाता है। इसमें धूमधाम से नगर में राधा-कृष्ण की शोभा यात्रा निकाली जाती है। उड़ीसा में राधा-कृष्ण के स्थान पर कृष्ण भगवान के जगन्नाथ रूप की नगर यात्रा निकाली जाती है। नगर यात्रा के संपन्न होने पर भगवान जगन्नाथ की प्रतिमाओं को परंपरागत रूप से सरोवर में स्नान करवाकर मंदिर में विराजित किया जाता है।