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Chhattisgarh
Bilaspur Bilaspur बिलासपुर.
पेयजल का मुख्य स्रोत बरसाती जल है लेकिन यह नहीं कहा जा सकता कि जहां अच्छी खासी बारिश होती है वहां पीने के पानी की तंगी नहीं होगी। चेरापूंजी इसका उदाहरण है। चेरापूंजी में सामान्यत: 15000 एम एल बारिश होती है, जो देश में सर्वाधिक है। इस पर भी वहां पेयजल संकट बरकरार रहता है क्योंकि चेरापूंजी में पेयजल को संग्रहित करने का कोई प्रबंध नहीं किया जाता। फलत: बरसाती पानी बह जाता है।
मौसम की फिजा में भाईचारे व रंगों की खुशबू है । ऐसे में जल संरक्षण की बात उठाने से चिढ़ने की जरूरत नहीं है बल्कि मैं तो कहूंगा ऐसे त्योहारों के मौके पर जल संरक्षण की आवश्यकता पर जोर शोर से बल दिया जाना चाहिए। कारण त्योहार की मस्ती में लोग पेयजल का बेतहाशा इस्तेमाल करते हैं। विचार कीजिए जर्मनी, अमरीका, ऑस्ट्रेलिया, अफ्रीका, चीन सहित भारत में पिछले दशक से जल संरक्षण हेतु अभियान चलाए जाने के बावजूद इतने बड़े पैमाने पर सिर्फ मस्ती के लिए पेयजल की अमूल्य निधि को बरबाद करना कहां तक उचित है?
मुंबई जैसे महानगर के लिए बरसाती पानी के संग्रह की कवायद काफी उपयोगी साबित हो रही है। ताजा उदाहरण मध्यप्रदेश के झाबुआ का है। जल संकट से निपटने के लिए इस शहर ने अपनी सभी पुरानी टंकियों, तालाब, बांध एवं सूख चुके कुओं का इस्तेमाल किया है। इनकी सफाई करवा कर । वर्षा जल संग्रह के दूरगामी लाभों का एक उदाहरण राजस्थान का जेसलमेर भी है। रेगिस्तानी प्रदेश का हिस्सा होने के बावजूद इस शहर ने कुएं व नहरों में बरसात का हजारों मिलियन टन लीटर पानी संग्रहित करने में सफलता प्राप्त कर जल संकट को नियंत्रित कर लिया है।
वहीं चेरापूंजी है जहां, देश की औसतन सर्वाधिक वर्षा होती है फिर भी वहां पेयजल संकट एक बड़ी समस्या बनी हुई है। देश की शासन प्रणाली के अनुसार पेयजल राज्य सरकार की जिम्मेदारी है। इस लिए देश के विभिन्न राज्यों ने अपने -अपने स्तर पर इस समस्या से निपटने के लिए अभियान छेड़ रखे हैं। मसलन कर्नाटक ने अपने 27 जिलों में वर्षा जल संग्रह केन्द्र शुरू करने की योजना बनाई है तो केन्द्र शासित प्रदेश दिल्ली ने नई आवासीय व वाणिज्यिक इमारतों में रेन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम अनिवार्य रूप से सुनिश्चित करने हेतु कानून बनाने की तैयारी की है।