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अस्पताल में सन्नाटा

रायपुर. पं. जवाहर लाल नेहरु मेडिकल के डाक्टरों की हड़ताल के चौथे दिन आंबेडकर अस्पताल के मरीजों का हाल और खराब हो गया। जूनियर डाक्टरों के रहमोकरम पर पड़े मरीज छुट्टी लेकर घर या निजी नर्सिंग होम जाने लगे हैं। शुक्रवार को होली के एक दिन पहले 50 फीसदी अस्पताल खाली हो गया।

आंबेडकर अस्पताल में अब केवल वही मरीज रह गए हैं, जिनके परिजन प्राइवेट में इलाज करने खर्च नहीं उठा सकते। इनमें भी गांव से आने वाले मरीज ज्यादा हैं। वे इसी आस में डटे हैं कि आज नहीं तो कल सरकार और डाक्टर उनकी सुध लेने के लिए आएंगे। इधर, हड़ताल के कारण मरीजों की संख्या कम होने से अस्पताल के स्टाफ को भी छुट्टी लेने का मौका मिल गया। इससे अस्पताल की गहमागहमी न सिर्फ कम हुई है, बल्कि कई जगह सन्नाटा परस गया है।

भीड़भरे वार्ड भी खाली

मरीजों से हमेशा फुल रहने वाले मेडिसिन और गायनोकोलाजी वार्ड में दर्जनभर से पेशेंट नहीं है। न्यूरो विभाग में भी इक्का-दुक्का मरीज ही भर्ती हैं। नेत्र विभाग, नाक-कान-गला और मनोरोग के वार्ड में तो तालाबंदी की स्थिति है। आईसीयू वार्डो में भी बड़ी मुश्किल से आठ मरीज ही दाखिल हैं। बर्न यूनिट में भी तीन मरीजों का ही इलाज चल रहा है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से आपात स्थिति के लिए 30 डाक्टर जिला अस्पताल से यहां सेवाएं दे रहें हैं।

इमरजेंसी लगभग बंद

सीनियर डाक्टरों ने भी इमरजेंसी सेवा चालू रखने की घोषणा की थी, लेकिन जब से हड़ताल शुरु हुई है, तब से ज्यादातर अस्पताल परिसर में देखे ही नहीं गए। विशेषज्ञों का कहना है कि होली के बाद मरीजों का फ्लो एकाएक बढ़ेगा।

उस समय हड़ताल जारी रहने की दशा में हालात बिगड़ने के आसार हैं। गौरतलब है कि मेडिकल कालेज के करीब 170 सीनियर व संविदा डाक्टर तथा 210 जूनियर डाक्टर 18 मार्च से हड़ताल पर हैं। उनकी प्रमुख मांग वेतनमान को लेकर है।

सोमवार को फैसला

मेडिकल कालेज के डाक्टरों ने हड़ताल जारी रखने का फैसला सोमवार तक टाल दिया है। सोमवार को सुबह 10 बजे कालेज में बैठक होगी। उसमें सर्वसम्मति से निर्णय लिया जाएगा।





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