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Chhattisgarh
Raipur Raipur रायपुर. शहर देर रात तक इस रंग में सराबोर हो गया। होलिका दहन शाम 7 बजे से शुरू होकर रात तक चला। करीब 500 जगह होली जली। रातभर फाग और नगाड़े गूंजते रहे।
होली में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस के दस्तों ने आज शाम 4 बजे से शहर में भ्रमण शुरू कर दिया। 100 से ज्यादा फिक्स पाइंट पर शाम 5 बजे तक सभी जवान तैनात कर दिए गए। होली की रात से अगले दिन रात तक शहर में 50 से ज्यादा दस्ते लगातार गश्त करेंगे।
सिटी एसपी डा. लाल उम्मेद सिंह ने बताया कि शहर में कोई भी संभावित घटना टालने अथवा उससे निपटने के लिए सभी प्रबंध कर लिए गए हैं। फायर ब्रिगेड के अलावा एंबुलेंस कभी व्यवस्था की गई है। अफसरों का कहना है कि होली में मस्ती चलेगी, लेकिन हुड़दंग पर पुलिस सख्ती करेगी।
शहर को आधा दर्जन जोन में बांटकर इंतजाम किए गए हैं। हर जोन पर सीएसपी स्तर के अधिकारी निगरानी रख रहे हैं। गल्र्स हास्टलों और मोहल्लों में महिला पुलिस तैनात कर दी गई। शाम से ही शहर में भारी वाहनों के घुसने पर पाबंदी लगा दी गई। पुलिस अफसरों ने लोगों से अपील की है कि मुखौटा न लगाएं।
दहन के बाद झूमे लोग
शहर में इस साल 500 से ज्यादा जगहों पर होली जलाई गई। शाम 7 बजे के बाद होलिका दहन का सिलसिला शुरू हुआ, जो देर रात तक चला। इस मौके पर जगह-जगह पारंपरिक पूजा-अर्चना हुई, जिसमें मोहल्ले के महिला, पुरुषों और बच्चों ने हिस्सा लिया। नगाड़े की थाप पर हुलियारों की टोली देर तक मस्ती में झूमती रही। इससे पहले दिनभर में नगरनिगम का अमला होलिका दहन के स्थान पर मुरम और रेत डालने में लगा रहा।
परंपराओं के रंग
होली के पहले ही दिन शहर के कुछ इलाके होली के रंग में डूब गए। इनमें पारंपरिक होली की झलक देखने को मिली। सदरबाजार का सराफा मार्केट से सुबह से बंद हो गया। यह मस्ती शनिवार को अपने पूरे शबाब पर रहेगी। बताते हैं, सदर बाजार की होली की परंपरा डेढ़ सौ साल से भी पुरानी है।
स्थानीय लोगों ने बताया कि यहां की होली की खासियत यहां 10 दिनों तक चलने वाला फाग और सेठ नाथूराम की बारात है। फागुन शुक्ल पक्ष की एकादशी को सेठ नाथूराम की बारात के साथ यहां की होली शुरू होती है, जो रंगपंचमी तक चलती है। रायपुर सराफा एसोसिएशन के सचिव मघेलाल मालू ने बताया कि 23 मार्च को ईद ए मिलाद उन नबी के जुलूस का सदरबाजार में जगह-जगह स्वागत किया जाएगा।
कीचड़ और ग्रीस भी
टिकरापारा, रामसागरपारा, कालीबाड़ी, स्टेशन रोड, पुरानी बस्ती आदि इलाकों में आज भी पारंपरिक होली के रंग देखे जा सकते हैं। हालांकि इनका स्वरूप काफी बदल गया है, लेकिन परंपरा चल रही है।
गुढ़ियारी, टिकरापारा और भनपुरी इलाके में आज भी कुछ लोग परंपरा के तौर पर ही सही, गोबर, कीचड़ और बैलगाड़ी के पहियों पर लगनेवाले काले ग्रीस से होली खेलते हैं। कुछ लोगों ने स्वीकार किया कि सांकेतिक तौर पर ही इनका उपयोग हो रहा है।
ट्रेनों में चौकसी बढ़ी
होली मनाने के लिए बाहर जानेवालों की भीड़ से स्टेशन के सभी प्लेटफार्म शुक्रवार को दिनभर खचाखच रहे। भीड़ में हुड़दंग रोकने के लिए रायपुर मंडल के सभी स्टेशनों में चौकसी कड़ी कर दी गई। स्टेशन से गुजरने वाली दर्जनभर लोकल-पैसेंजर ट्रेनों में खासी भीड़ रही। डोंगरगढ़ से आने वाली लोकल और पैसेंजर ट्रेनें फुल थीं। कोरबा-नागपुर, रायपुर-दुर्ग और बिलासपुर-डोंगरगढ़ ट्रेन में पांव रखने की जगह नहीं मिली। जेडी पैसेंजर की बोगियां भी भरी रहीं।
जीआरपी और आरपीएफ ने ट्रेनों और स्टेशनों में तगड़ी व्यवस्था की है। रायपुर समेत मंडल के आधा दर्जन छोटे स्टेशनों पर जवान तैनात कर दिए गए। जीआरपी थाना प्रभारी एसएन अख्तर ने बताया कि रायपुर में करीब 45 जवानों को तैनात किया गया है। प्लेटफार्म, स्टेशन परिसर और रेलवे आउटर क्षेत्रों में जगह-जगह जवानों की निगाह रहेगी।