भोपाल. स्कूल की योजनाओं में विद्यार्थियों की हिस्सेदारी पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है। इसके लिए अगले शिक्षा सत्र से स्कूलों में सुझाव बाक्स लगाए जाएंगे। वहीं, दूसरी ओर संस्कृत के विद्यार्थियों को 9वीं से 12वीं तक प्रदान की जाने वाली मेरिट छात्रवृत्ति के मामले में आवेदन की अंतिम तारीख निकलने के बाद केंद्र को आवेदन पत्र भेजा गया। इससे करीब 40 हजार विद्यार्थियों की छात्रवृत्ति के डूबने के आसार हैं।
स्कूल की प्लानिंग में हिस्सा लेंगे छात्र
भोपाल अब स्कूल की योजना में विद्यार्थी भी हिस्सा ले सकेंगे। छात्र यह बता सकेंगे कि वे स्कूल और शिक्षकों से क्या चाहते हैं। अगले शिक्षा सत्र में इस योजना को लागू करने पर गंभीरता से विचार किया जाएगा।
स्कूल शिक्षा विभाग के अधिकारी कहते हैं कि विभिन्न स्कूलों में किए गए निरीक्षणों से यह बात सामने आई है कि कई बार झिझक से विद्यार्थी अपनी बात शिक्षक के सामने खुलकर नहीं रख पाते। इसलिए इस बात पर विचार चल रहा है कि स्कूलों में सुझाव बाक्स लगाए जाएं। इसमें छात्र ऐसे विचार लिखकर डाल सकेगा, जो वह टीचर के सामने नहीं रख पा रहा है। शुरुआत में कुछ स्कूलों में यह प्रयोग किया जाएगा।
स्कूल से संबंधित जो भी विचार सामने आते हैं उन पर अमल भी किया जाएगा। कई बार ऐसा होता है कि विद्यार्थी खुलकर अपने विचार शिक्षक के सामने रखने में झिझकता है। ऐसे विद्यार्थियों के लिए स्कूल में बाक्स लगाने पर विचार किया जा रहा है।
-डा.ओपी शर्मा, संयुक्त संचालक, स्कूल शिक्षा
40 हजार छात्रों की छात्रवृत्ति डूबी
प्रदेश के करीब 40 हजार संस्कृत विद्यार्थियों की छात्रवृत्ति डूब गई है। केंद्र ने इन विद्यार्थियों के आवेदन को अमान्य कर दिया है। मामले में राहत के लिए अब एक कांग्रेसी विधायक ने केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री अजरुन सिंह से गुहार की है।
संस्कृत के प्रतिभावान विद्यार्थियों को 9वीं से 12वीं तक प्रदान की जाने वाली मेरिट छात्रवृत्ति में इस साल केंद्र सरकार ने नियम बदल दिए थे। बदले गए नियमों के तहत केंद्र सरकार ने मध्यप्रदेश के सभी विद्यार्थियों से सीधे आवेदन मांगे थे, जबकि अभी तक मप्र स्कूल शिक्षा विभाग को आवेदन किया जाता था। इस बार विद्यार्थियों ने आवेदन किए, तो केंद्र ने अमान्य कर दिए। केंद्र के मुताबिक अक्टूबर में ही आवेदन की अंतिम तारीख निकल चुकी है और 31 मार्च तक तो छात्रवृत्ति बांटना है। इस कारण आवेदन निरस्त किए गए हैं। मामले में प्रमुख सचिव एमएम उपाध्याय का कहना है कि अभी उनके पास यह मामला नहीं आया है।
फरवरी में आवेदन मांगे
मप्र स्कूल शिक्षा विभाग के अधिकारियों के मुताबिक केंद्र ने बदले गए नियम की जानकारी फरवरी में दी। इसके तहत विद्यार्थियों को सीधे आवेदन के लिए कहा गया। जब विद्यार्थियों ने आवेदन किया, तो केंद्र सरकार के मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने निरस्त कर दिए हैं। जब तारीख अक्टूबर में निकल गई, तो फरवरी में आवेदन क्यों मंगाए गए?
अजरुन सिंह को पत्र
सैकड़ों विद्यार्थियों के आवेदन निरस्त होने पर कांग्रेसी विधायक अजय सिंह ‘राहुल भैय्या’ ने मानव संसाधन विकास मंत्री अजरुन सिंह को पत्र लिखकर सीधे आवेदन का नियम अगले सत्र से लागू करने की गुहार की है। उनके लिखे पत्र में इस साल आवेदन करने वाले सभी विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति देने की अपील है।