भोपाल. समाजवादी पार्टी के निलंबित विधायक किशोर समरीते ने शुक्रवार को राज्यसभा चुनाव से जुड़े रिश्वत मामले में पुलिस को बयान दिए। इसके बाद उन्होंने आरोप लगाया कि सपा के कई विधायकों ने चुनाव के लिए पैसा लिया है। इस मामले की सीबीआई जांच हो तो झारखंड मुक्ति मोर्चा के सांसद रिश्वत कांड से बड़े मामले का खुलासा हो सकता है। उन्होंने कहा कि विधायकों को रिश्वत देने की बात प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सुरेश पचौरी के बंगले पर तय हुई थी।
शुक्रवार की सुबह करीब पौने 11 बजे श्री समरीते ने पुलिस कंट्रोल रूम में जांच अधिकारी एएसपी जीके पाठक को बयान दर्ज कराए। करीब एक घंटे तक बयान देने के बाद उन्होंने पत्रकारों से बात की। श्री समरीते ने कहा कि उन्होंने जो बयान दिए हैं उसमें उन्होंने बताया कि 14 मार्च को उन्हें नेता प्रतिपक्ष जमुना देवी ने विधायक दल की बैठक का पत्र देकर बुलाया था।
उनसे विधानसभा के कक्ष में मिले। बाद में जमुना देवी की कार से पूर्व मंत्री नर्मदा प्रसाद प्रजापति उन्हें श्री पचौरी के बंगले पर ले गए। वहां सपा के कई विधायक थे। वहां श्री पचौरी, राज्यसभा चुनाव के निर्दलीय प्रत्याशी विवेक तन्खा, पूर्व मंत्री राजेंद्र सिंह भी थे। वहां कहा गया कि आपको श्री तन्खा को वोट देना है। आपका बाकी काम दिल्ली से हो जाएगा। संकेतों में कई प्रलोभन दिए गए। बाद में श्री पचौरी सपा प्रदेश अध्यक्ष नारायण त्रिपाठी और विधायक अजरुन पलिया को चार्टर प्लेन में दिल्ली ले गए।
श्री समरीते ने कहा कि उन्होंने जमुना देवी का पत्र पुलिस को दे दिया है। इसके अलावा जिस दिन उन्हें रिश्वत के 10 लाख रुपए दिए गए उस दिन उनके मोबाइल फोन पर जो काल आए उसकी डिटेल भी पुलिस निकलवा रही है। यह पूछे जाने पर कि क्या उन्होंने अधिक पैसों की मांग थी और पर्याप्त पैसा नहीं मिलने पर ऐसा किया? श्री समरीते ने कहा कि वे गरीब आदमी हैं। कच्चे मकान में रहते हैं। उन्होंने दावा कि 10 लाख रुपए उन्होंने पहले बार देखे। वे चाहते तो यह रुपए रख सकते थे। साथ ही श्री समरीते ने आरोप लगाया कि सपा के कई विधायकों ने कांग्रेस से पैसा लिया है, लेकिन ऐसे लोगों में सुनीलम शामिल नहीं हैं।
नक्सल समर्थक होने के आरोपों पर श्री समरीते ने कहा कि उनकी भारतीय संविधान में आस्था है। बालाघाट में मजदूरों का भुगतान नहीं होने पर उन्होने आंदोलन किया। यही मांग नक्सली कर रहे थे, इस कारण भाजपा-कांग्रेस दोनों ने चुनाव हारने के बाद उन्हें नक्सल समर्थक बताने की कोशिश की। श्री समरीते ने दावा किया कि राज्यसभा चुनाव के पहले पुलिस इस मामले में एफआईआर दर्ज कर लेगी, यदि ऐसा नहीं हुआ तो वे हाईकोर्ट जाएंगे।