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साहब के आदेश पर नियम का रंग

इंदौर. यूनिवर्सिटी में रजिस्ट्रार आर.डी. मूसलगांवकर और डिप्टी रजिस्ट्रार आर.के. बघेल की होली ने भी सालभर रंग जमाया। साहब आदेश देते तो डिप्टी रजिस्ट्रार कहते इसमें मेरा नियम भी शामिल कर लो। दोनों मौका मिलते ही एक-दूसरे पर पिचकारियां चलाते रहे। इन रंगीन पिचकारियों के छींटे अन्य अधिकारियों पर पड़ने के बाद पूरे नालंदा में इसी होली की चर्चा रही।

पिचकारियां तो तैयार हैं मौका नहीं
दो प्राचार्य डॉ. नरेंद्र धाकड़ और डॉ. शंकरलाल गर्ग पिचकारियां लेकर कई दिनों से बैठे हैं पुराना हिसाब बराबर करने के लिए लेकिन मौका ही नहीं मिल रहा। ये तो मौका न मिलने से परेशान हैं लेकिन स्टाफ उस क्षण का बेसब्री से इंतजार कर रहा है कि कब दोनों एक-दूसरे को सराबोर कर दें।

राजनीति में ईकोफ्रेंडली होली
पानी बचाओ के नारे के साथ बाजार में प्राकृतिक रंगों की खासी मांग है। बात राजनीति की करें तो रंगों की जरूरत ही नहीं। महापौर और मंत्री गुट को बगैर रंग के लाल-पीला किया जा सकता है। जरूरत है दोनों पक्षों को आमने-सामने खड़ा करने की।

एकतरफा पिचकारी
कलेक्टर विवेक अग्रवाल की पिचकारी हमेशा एकतरफा चलती है। किसी अधिकारी की हिम्मत नहीं कि उनकी पिचकारी का जवाब दें। हालांकि कुछ समय पहले एक अधिकारी ने दूसरी तरफ पिचकारी चलाने की कोशिश भी की मगर उन्हें मैदान छोड़ना पड़ा।

एसिड की होली
कैंसर हॉस्पिटल में अधीक्षक की कुर्सी को लेकर विवाद की होली लंबे समय से जल रही है। एक-दूसरे को बदरंग करने के लिए डॉ. गुप्ता और डॉ. फखरुद्दीन दोनों ही कीचड़ उछाल रहे हैं। हालांकि बीच में पिचकारियों की जगह कांच की बोतल ने ले ली और डॉ. गुप्ता की गाड़ी पर रंगों की जगह एसिड फेंककर कुंठा की होली भी मनाई जा चुकी है। इस होली पर दोनों गले-मिलकर हॉस्पिटल को होली की तरह राख होने से बचा लें।

रंग मैंने भरा और..
पलासिया क्षेत्र में मार्च में हुए बिल्डर हत्याकांड के खुलासे को लेकर पुलिस महकमे में खूब पिचकारियां चलीं पर दो पलड़ों के बीच में खड़े पुलिस कप्तान पर ही सारा रंग आ गिरा। एक वरिष्ठ अधिकारी की नाराजगी इस पर थी कि साक्ष्यों के रंग जुटाए मैंने और आरोपी से बयानों से पिचकारी भी भरी लेकिन जब उसे चलाने का मौका आया तो क्राइम के पट्ठे और थाने वाले पिचकारी चलाकर होली मना गए। अब हर कोई उन्हें मनाने की जुगत में है कि साहब बुरा न मानो होली है..

आज न छोड़ेंगे..
डेंटल कॉलेज में पढ़ाने वाले डॉ. सुरेंद्र दिल्लीवाल और डॉ. देशराज जैन ने भी सालभर अघोषित रूप से खूब होली खेली। किसी भी मामले में दोनो यह कह कर आज ना छोडें़गे.. मौका ही तलाशते रहे एक-दूसरे पर रंग डालने का। हालांकि डीन डॉ. बी.एम. श्रीवास्तव ने दोनों की इस होली में कई बार डॉ. जैन को अपने पास बैठा कर रंगने से बचा लिया।

कोई मौका नहीं चूके
शासकीय आष्टांग आयुर्वेद कॉलेज में दो व्यक्ति एक तो प्रोफेसर जी.एल. टीटोनी और दूसरे प्रभारी प्राचार्य डी.पी. अग्रवाल ऐसे हैं जिन्होंने सालभर में कोई भी मौका नहीं चूका एक-दूसरे पर रंग डालने का। चाहे वो कॉलेज में रैंगिंग का मामला हो या कोई अन्य दोनों ने रंग की पिचकारियां तैयार ही रखीं और मौका मिलते ही कमाल दिखा दिया। इन दोनों के रंग को देख छात्र भी पढ़ाई छोड़ रंगीन हो गए।





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