इंदौर. राजबाड़ा से निकली फागयात्रा में होलकरकालीन शान-शौकत देखने को मिली। होलकर वंश की पोशाखें पहने युवक-युवती राजा-महाराजा की तरह निकले। यात्रा मार्ग को फूलों से सजाया गया। यात्रा के बाद राजबाड़ा के गणोश हॉल में अहिल्या दरबार सजाया गया।
लोक संस्कृति मंच द्वारा आयोजित फाग उत्सव की शुरुआत शाम को हुई। यात्रा में आगे उद्घोषक थे पीछे राजा-महाराजाओं की अगवानी करते महाकाल, उज्जैन के बड़ाबीन धमाके करते चल रहे थे। बैंड-पार्टी माहौल को दोगुना कर रही थी।
इसके पीछे सन् 1728 से लेकर 1948 तक होलकर राजवंश के विभिन्न शासकों की वेशभूषा धारण किए युवक-युवती अश्व पर सवार थे। बग्घियों पर संत-महात्मा थे। माता अहिल्या का रथ था उनके पीछे महिलाएं होली के गीत गाती चल रही थीं।
भजन गायक हरिकिशन साबू भोंपूजी, मनीष तिवारी और बाबू राजोरिया फाग गीत गाते चल रहे थे। मंच संयोजक शंकर लालवानी ने बताया यात्रा सराफा, शक्कर बाजार, खजूरी बाजार, सीतलामाता बाजार, यशोदा मंदिर होते हुए पुन: राजबाड़ा पहुंची। फिर गणोश हॉल में मां अहिल्या का दरबार सजाया गया। दरबार में भोंपूजी ने फाग गीत प्रस्तुत किए। इस मौके पर सतीश शर्मा, राजेंद्र गर्ग, रूपकिशोर गुप्ता, मुद्रा शास्त्री, दीपक लवगंडे सहित अन्य लोग उपस्थित थे।
छावनी से निकली फागयात्रा : शुक्रवार शाम छावनी से निकली रंगारंग राधाकृष्ण फागयात्रा में हजारों लोगों ने भाग लिया। होली की मस्ती में चूर सभी लोग रंग-गुलाल व फूलों की पंखुड़ी उड़ाते चल रहे थे तो वहीं घर-घर से भी उन पर फूलों और रंगों की बरसात हो रही थी।
मुरलीमनोहर मंदिर से निकली यात्रा में बैंडबाजे, हाथी, घोड़े और बीच में भगवान राधाकृष्ण की चैतन्य झांकियां भी थीं। 24 फीट लंबी झांकी में राधा-कृष्ण को बाल-ग्वालों के साथ फाग खेल रहे थे। यात्रा संयोजक पवन अग्रवाल, अनिल अग्रवाल, अमित गुप्ता, विमल सैनी, राकेश मामा ने व्यवस्था संभाली।