नई दिल्ली. महंगाई से निपटने के लिए सरकार स्टील की कीमतों को काबू में रखने के सारे विकल्प अपनाने पर विचार कर रही है।
अभी स्टील की कीमतों में 25 फीसदी इजाफा हो चुका है। उद्योग का मानना है कि कीमतों पर नियंत्रण का प्रयास किया तो विकास प्रभावित होगा।
स्टील मंत्रालय के सचिव राघव शरण पांडे का कहना है कि स्टील की कीमतें तीन माह में काफी ज्यादा बढ़ चुकी हैं। इन पर नियंत्रण रखने के लिए जरूरी तमाम प्रयास किए जाएंगे।
टीएमटी बार का इस्तेमाल आम आदमी करता है और फ्लैट स्टील लगातार बढ़ता गया है। पांडे ने बताया कि उद्योग कीमतें बढ़ने के पीछे महंगे कच्चे माल को जिम्मेदार ठहरा रहा है। निर्यात पर रोक लगाकर और आयात शुल्क में कटौती से आपूर्ति बढ़ाई जा सकती है।
स्टील मंत्री रामविलास पासवान स्टील उद्योग के लिए नियामक तैनात करने पर भी विचार को तैयार हैं, लेकिन वह स्टील में लगने वाले इनपुट की कीमतों को भी कम रखने के पक्ष में हैं। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को लिखे पत्र में पासवान ने कहा है कि सरकार स्टील पर 10 फीसदी निर्यात शुल्क लगाने पर विचार करना चाहिए। दूसरी तरफ आयात शुल्क समाप्त कर देना चाहिए। पासवान ने स्टील के निर्यात पर से ड्यूटी ड्रा बैक स्कीम खत्म करने की सिफारिश की है।
सरकार की चिंता यह है कि स्टील की कीमतों के कारण मुद्रास्फीति बढ़ रही है। पांडे की राय में स्टील मंत्री ने मनमोहन सिंह से कहा है कि स्टील को आवश्यक वस्तु अधिनियम में डाल देना चाहिए।
इंडियन स्टील एलायंस के अध्यक्ष मूसा रजा का कहना है कि लौह अयस्क की कीमतें छह माह में तीन गुनी यानी 150 डॉलर हो गई हैं। दूसरी तरफ स्क्रैप की कीमतें 285 डॉलर के मुकाले 500 डॉलर हो गई हैं।