हैदराबाद. वाम नेताओं ने केंद्र की यूपीए सरकार पर न्यूनतम साझा कार्यक्रम में निहित स्वतंत्र विदेश नीति से जानबूझकर हटने का आरोप लगाते हुए कहा कि वे अमेरिका के साथ सैन्य सहयोग का विरोध जारी रखेंगे। उन्होंने भाजपा व कांग्रेस से अलग तीसरे राजनीतिक विकल्प को समय की जरूरत बताया।
यहां रविवार से शुरू हुई भाकपा की 20वीं राष्ट्रीय कांग्रेस को संबोधित करते हुए पार्टी महासचिव एबी वर्धन ने कहा, ‘हमें (आईएईए के साथ) भारत केंद्रित सुरक्षा उपाय समझौते से कोई समस्या नहीं है। हमारा विरोध अमेरिका के साथ परमाणु करार से है।’ उन्होंने कहा कि करार परमाणु ऊर्जा हासिल करने का प्रयास भर नहीं है बल्कि यह सामरिक भागीदारी की कोशिश है।
करार के खिलाफ संघर्ष : वहीं कांग्रेस में शामिल हुए माकपा महासचिव प्रकाश करात ने भी कहा कि वाम दल एटमी करार के खिलाफ संघर्ष में अग्रणी हैं और वे देश को अमेरिका के सामरिक रिश्तों की जकड़न से अलग करने के लिए लड़ाई जारी रखेंगे। भाकपा की राष्ट्रीय कांग्रेस में माकपा, फारवर्ड ब्लॉक और रिवोल्युशनरी सोशलिस्ट पार्टी (आरएसपी) के प्रतिनिधि भी भाग ले रहे हैं।
तीसरे विकल्प पर जोर : तीसरे विकल्प की चर्चा करते हुए वर्धन ने कहा, ‘यही समय है कि हमें लोक महत्व के मुद्दों पर साझा संघर्ष के जरिए कांग्रेस व भाजपा दोनों से अलग वाम लोकतांत्रिक विकल्प निर्मित करने का प्रयास करना चाहिए।’ करात ने भी लोगों के सामने तीसरा विकल्प पेश करने के लिए वाम एकता को जरूरी बताया।
उग्र आंदोलन की चेतावनी : आवश्यक वस्तुओं की बढ़ती कीमतों को काबू में न रख पाने के लिए यूपीए सरकार की आलोचना करते हुए वर्धन ने आवश्यक वस्तुओं में वायदा व्यापार पर रोक, आवश्यक वस्तु अधिनियम में संशोधन और व्यापक सार्वजनिक वितरण प्रणाली की बहाली जैसी मांगों के समर्थन में उग्र आंदोलन छेड़ने की चेतावनी दी।
निजी क्षेत्र में आरक्षण का समर्थन : वर्धन ने सार्वजनिक उपक्रमों के निजीकरण और खुदरा व्यापार में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश का विरोध करते हुए निजी क्षेत्र में आरक्षण का समर्थन किया। उन्होंने कर्ज माफी योजना को किसानों की समस्याएं सुलझाने के लिए नाकाफी बताया।
चार दिवसीय पार्टी सम्मेलन में 30 देशों के कम्युनिस्ट अतिथियों सहित एक हजार प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं।