भोपाल. प्रदेश की शिक्षा का भविष्य तय करने के लिए अब चार राज्यों का अध्ययन करने का फैसला हुआ है। इनके लिए अप्रैल माह से दूसरे राज्यों में जाएगा शिक्षकों का दल।
नया शिक्षा सत्र क्रांतिकारी साबित हो सकता है। इसकी वजह आंध्रप्रदेश और तमिलनाडु के साथ ही अब केरल और कर्नाटक की शिक्षा व्यवस्था को अपनाने की प्रक्रिया है।
सरकार ने शिक्षा के क्षेत्र में माडल साबित हुए चार राज्यों का अध्ययन करके नए सत्र की शिक्षा व्यवस्था तय करने का फैसला किया है। इसके तहत ढाई हजार शिक्षकों को इन चारों राज्यों का अध्ययन करने भेजा जाएगा। ये शिक्षक रिपोर्ट देंगे कि कहां की व्यवस्था बेहतर है। शिक्षकों को दल में भेजने की शुरुआत अप्रैल में चेन्नई से होगी। पहले प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा में यह प्रयोग होंगे। सबसे ज्यादा जोर तमिलनाडु और आंध्रप्रदेश की व्यवस्था के अध्ययन पर है।
तमिलनाडु में शिक्षकों का एक दल भेजा जा रहा है। उसके बाद अन्य दल भेजेंगे। उनकी रिपोर्ट के आधार पर शिक्षा व्यवस्था तय करेंगे।
- एमएम उपाध्याय, प्रमुख सचिव, मप्र स्कूल शिक्षा विभाग
राज्यों का प्रजेंटेशन
पिछले दिनों इन चारों राज्यों के प्रतिनिधियों ने मप्र में अपने-अपने माडलों का प्रजेंटेशन दिया था। इसके बाद ही प्रदेश से शिक्षकों के दल भेजने का फैसला किया गया।
मिश्रित व्यवस्था पर भी विचार
यह भी विचार किया जा रहा है कि चारों राज्यों की व्यवस्था में जो बेस्ट स्कीम हो, उन्हें अपना लिया जाए। इसके लिए इन राज्यों की एक मिश्रित व्यवस्था तैयार करने पर भी विचार किया जा रहा है।
किस राज्य से क्या
>> आंध्रप्रदेश-शिक्षकों की परीक्षा लेना और ग्रेडिंग करना।
>> तमिलनाडु-एक्टिविटी बेस्ड र्ल्िनग प्रोजेक्ट 5वीं तक, परीक्षा नहीं।
>> केरल-सामुदायिक समितियों की भूमिका व शाला प्रबंधन समिति।
>> कर्नाटक-चैतन्य माडल। बहुकक्षीय संचालन, र्ल्िनग कार्डे के जरिए।