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वित्तीय वर्ष के अंतिम दिनों ने बदली दिनचर्या

भोपाल. लक्ष्य पूरे करने के लिए हर विभाग के अधिकारी, कर्मचारी का ‘मार्च’ हो रहा है। वहीं खाता बराबर करने की कोशिश के चलते व्यापारी और सीए भी व्यस्त हैं।

मार्च का अंतिम सप्ताह शुरू होते ही सरकारी दफ्तरों का नजारा बदल गया है। छुट्टी और रविवार को भी काम निपटाए जा रहे हैं। चार्टर्ड अकाउंटेंट, कर सलाहकार और व्यापारी भी काफी व्यस्त हैं।

कोषालय अधिकारी-कर्मचारियों के कारण इस बार भारी मात्रा में बिलों और चालानों का खतरा मंडरा रहा है। वित्त वर्ष का अंतिम महीना सरकारी विभागों के लिए अपने लक्ष्य पूरे करने और लंबित कार्यो को निपटाने वाला होता है। बैंक, बीमा और फाइनेंस कंपनियों के अधिकारी, प्रतिनिधि भी लक्ष्य पूरे करने दौड़ भाग कर रहे हैं।

पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों के अनुसार इन दिनों छुट्टी और रविवार को भी लगभग पूरा स्टाफ दफ्तर में होता है। जो काम निपट चुके हैं उनके बिल देने ठेकेदारों से कहा जा रहा है। अगर किसी ठेकेदार का पुराना बिल अटका हुआ है, तो उसे भी निपटाने की कोशिश की जा रही है।

कागजों में कमी

यही स्थिति सभी सरकारी विभागों की है। पीएचई के सेवानिवृत्त मुख्य अभियंता एसएस रघुवंशी के अनुसार यदि बजट का उपयोग नहीं हुआ, तो राशि लैप्स हो जाती है। वित्त वर्ष का अंतिम महीना होने से खाते ठीक करना होते हैं। केंद्र व अन्य स्रोतों से मिली ग्रांट का उपयोग सुनिश्चित करना होता है। श्री रघुवंशी के अनुसार अकसर होता यह है कि राशि तो खर्च हो चुकी होती है, लेकिन कागजों में कमी रहती है। मार्च में सब कमियां पूरी करना जरूरी होता है।

बैंकों में जमा के लिए मारा-मारी

जहां एक तरफ सरकारी विभागों में इस समय राशि खर्च करने की होड़ लगी है, वहीं बैंक ज्यादा से ज्यादा राशि जमा कराने का प्रयास कर रहे हैं। एक बैंक अधिकारी के अनुसार दस करोड़ या उससे अधिक की एफडी के लिए बैंक विशेष ब्याज दर भी देने को राजी हो जाते हैं। यूनियन बैंक के सेवानिवृत्त मैनेजर जेपी मल्होत्रा के अनुसार हर बैंक और हर शाखा का जमा का लक्ष्य होता है।

इसे पूरा करने के लिए शाखा प्रबंधक संस्थागत ग्राहकों के पास जाकर निवेश के लिए प्रोत्साहित करते हैं। बैंक ऑफ बड़ौदा के मार्केटिंग मैनेजर रामानुज शर्मा के अनुसार कम्प्यूटरीकरण, कोर बैंकिंग, एटीएम और सुबह आठ से रात आठ तक शाखाएं खुलने से कागजी कार्रवाई में समय पहले के मुकाबले कम लगने लगा है।

सीए और व्यापारी भी व्यस्त

चार्टर्ड अकाउंटेंट, कर सलाहकार और व्यापारी भी काफी व्यस्त हैं। भोपाल स्टॉक एक्सचेंज एसोसिएशन के अध्यक्ष संतोष अग्रवाल के अनुसार व्यापारी इन दिनों खाता बराबर करने की कोशिश करते हैं। उन्हें सारे लेन-देन, आयकर की आखिरी किश्त और वाणिज्यिक कर के रिटर्न जमा करने होते हैं। हर व्यापारी पर इसका दबाव बना होता है। सीए अमित जैन के अनुसार अब टीडीएस समय से जमा करना जरूरी हो गया है, इसके लिए हर क्लाइंट के खाते को बारीकी से जांचना पड़ता है। सेवाकर भी 31 मार्च तक जमा करना है। कर सलाहकार विनय श्रीवास्तव के अनुसार इस समय सभी क्लाइंट्स की बैलेंस शीट पूरी कर उनका कर जमा कराना होता है।

आंदोलन से अटका भुगतान

मार्च में कोषालय अधिकारियों के आंदोलन ने अन्य सरकारी विभागों के अधिकारियों और ठेकेदारों की परेशानियां बढ़ा दी हैं। वर्क टू रूल आंदोलन कर रहे यह कर्मचारी कोषालय में रोजाना आने वाले बिलों में से 90 प्रतिशत में खामियां निकालकर उन्हें लौटा रहे हैं।

तीन दिन में विंध्याचल ट्रेजरी में लगभग 720 बिल लंबित हो गए हैं, मंत्रालय की ट्रेजरी में 600 और जिला कोषालय में करीब सौ बिल लंबित हैं। कुल 65 से 70 करोड़ रुपए का भुगतान अटका है। प्रदेशभर में यह आंकड़ा एक हजार करोड़ रुपए के आसपास बताया जा रहा है। सोमवार से क्रमिक भूख हड़ताल के बाद गुरुवार से अनिश्चितकालीन हड़ताल होगी।

उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने मांगें मानने की बजाय अधिकारी-कर्मचारियों के खिलाफ कदम उठाया तो अनिश्चितकालीन हड़ताल सोमवार से भी शुरू हो सकती है। उन्होंने इस आशय का पत्र भी शासन को सौंप दिया है।





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