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नहीं बढ़ेगी राजधानी की जलदर

भोपाल. शहरवासियों को फिलहाल पानी के लिए ज्यादा पैसे नहीं चुकाने होंगे, लेकिन मकान बनाने के लिए अनुमति लेना कुछ महंगा होगा। सोमवार को होने वाली निगम परिषद की बैठक में बजट कुछ संशोधनों के बाद पारित कर दिया जाएगा।

राजधानी में जलदर नहीं बढ़ेगी और नर्मदा उपकर में काफी कमी की जाएगी। साथ ही अन्य लाइसेंस फीस व शुल्कों में भी ज्यादा वृद्धि नहीं होगी। निगम परिषद अध्यक्ष कोटा, पार्षद कोटा व एल्डरमेन कोटा यथावत रखा जाएगा। नगर निगम के बजट को इन संशोधनों के बाद पारित करने की तैयारी है। यह फैसला रविवार को भाजपा पार्षद दल की बैठक में लिया गया।

नगर निगम परिषद की बुधवार को स्थगित की गई बैठक सोमवार को होगी। इस बैठक में निगम बजट पर चर्चा होगी। भाजपा पार्षद दल की बैठक में यह निर्णय लिया गया कि जलदर को 60 से बढ़ाकर 180 रुपए प्रतिमाह करने का प्रस्ताव निरस्त कराया जाएगा।

निर्यात कर की सूची को पुनरीक्षित करने के प्रस्ताव को भी खारिज किया जाएगा। भवन अनुज्ञा पर नर्मदा उपकर का प्रस्ताव संशोधन के बाद पारित किया जाएगा। इसमें एक हजार वर्ग फीट तक कोई उपकर नहीं लगेगा, क्षेत्रफल बढ़ने के साथ इसमें क्रमश: वृद्धि होती जाएगी और अधिकतम 10 रुपए प्रति वर्ग फीट की दर से राशि वसूली जाएगी। लाइसेंस फीस में 20 से 25 प्रतिशत तक और नामांतरण शुल्क में 20 से 30 प्रतिशत तक वृद्धि की जाएगी।

पार्षद कोटा निर्धारित होगा:

बजट में पार्षदों का कोटा निर्धारित किया जाएगा। निगम के 2008-09 के प्रस्तावित बजट में महापौर कोटा व पार्षद कोटा कर लगाने की शर्र्तो के साथ जोड़ दिया गया है। अध्यक्ष कोटा व एल्डरमेन कोटा का कोई जिक्र नहीं है।

भाजपा पार्षद दल की बैठक में निर्णय लिया गया कि अध्यक्ष कोटा 66 लाख रुपए, पार्षद कोटा प्रत्येक पार्षद को पांच लाख रुपए व एल्डरमेन कोटा चार लाख रुपए निर्धारित किया जाएगा। महापौर कोटा के संबंध में कोई चर्चा नहीं होगी।

पार्षदों को उनके वार्ड के संपत्तिकर का 50 फीसदी भी विकास कार्र्यो के लिए मिलेगा। बजट में यह प्रावधान भी समाप्त कर दिया गया था। बैठक में कुछ पार्षदों ने मांग की कि संपत्तिकर की बकाया की वसूली का 50 प्रतिशत भी पार्षदों को मिलना चाहिए। वर्तमान में पार्षदों को केवल चालू वित्त वर्ष की वसूली का 50 प्रतिशत मिलता है।

बैठकों के दौर

बुधवार को निगम परिषद की बैठक होने के बाद से भाजपा पार्षदों की बैठक के दौर चल रहे हैं। विधायक उमाशंकर गुप्ता ने अनेक बार पार्षदों से चर्चा की। कई दौर की चर्चा के बाद रविवार को इसके संबंध में फैसले लिए गए।





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