भोपाल. सीबीएसई स्कूलों की तर्ज पर प्रदेश के लाखों विद्यार्थियों को अब स्कूल में दो सौ दिन पढ़ाई करना पड़ेगी। इसके लिए नए सिरे से शिक्षा का कैलेंडर तैयार किया जाएगा।
स्कूलों में अध्यापन दिवस 200 दिन करने का उद्देश्य शिक्षा की गुणवत्ता सुधारना और बेहतर परीक्षा परिणाम प्राप्त करना है। विभाग की सोच है कि स्कूलों में ज्यादा दिन पढ़ाई होने से इसका बेहतर असर होगा।
स्कूल शिक्षा विभाग के अधिकारी बताते हैं कि ज्यादा पढ़ाई यानी ज्यादा अच्छा परीक्षा परिणाम। हाल-फिलहाल स्कूलों में लगभग 180 दिन कक्षाएं लगती हैं। अगर बीच में प्रैक्टिकल आ गए तो दिनों की संख्या और कम हो जाती है, महीने के अंत में तो कई बार पढ़ाई नहीं हो पाती है। इस संबंध में अगले चार-पांच दिनों में विभाग के अधिकारियों की बैठक भी होगी जिसमें इसे मूर्त रूप दिया जाएगा।
प्रैक्टिकल ने बिगाड़ा गणित:
इस बार प्रैक्टिकल फरवरी में होने से एक सौ अस्सी दिन भी कक्षाएं नहीं लग पाईं। पहले मार्च में प्रैक्टिकल होते थे। स्कूल शिक्षा विभाग के अधिकारी बताते हैं कि सीबीएसई और मिशनरी स्कूल साल भर में दो सौ दिन से भी ज्यादा लगते हैं। ज्यादा दिन पढ़ाई होने से सीबीएसई स्कूलों का रिजल्ट भी अच्छा आता है।
सुभाष उत्कृष्ट विद्यालय के प्राचार्य राजेश तिवारी कहते हैं अप्रैल में कुछ शिक्षक कापी जांचने का काम करते हैं, बाकी के पास कोई काम नहीं होता। इसलिए विचार किया जा रहा है कि टीचिंग डे बढ़ा दिए जाएं। इससे फायदा यह होगा कि कोर्स जल्दी खत्म होगा और बच्चों को रिवीजन का मौका मिलेगा।
स्कूलों में दो सौ दिन कक्षाएं लगाई जाएं इसके पीछे विभाग की सोच यह है कि ज्यादा दिन पढ़ाई होने से अच्छे परिणाम मिल सकते हैं। इस मुद्दे पर बैठक भी होगी जिसमें योजना को मूर्त रूप दिया जाएगा। कई निजी स्कूल औसतन दो सौ दिन लग रहे हैं और वहां के परीक्षा परिणाम भी अच्छे है।
-डा. केके पांडेय, संयुक्त संचालक, स्कूल शिक्षा