भोपाल. नर्मदा परियोजना के तहत जारी कार्यादेश के वर्क कांट्रेक्ट की श्रेणी में आने के कारण केंद्रीय उत्पाद शुल्क एवं सेवाकर विभाग ने सेवा कर लगाने की तैयारी कर ली है।
राजधानी की नर्मदा पेयजल परियोजना पर केंद्रीय उत्पाद शुल्क एवं सेवाकर विभाग की भी निगाह लग गई है। विभाग इस पेयजल परियोजना पर चार प्रतिशत की दर से सेवा कर लगाने की तैयारी कर रहा है। साथ ही सरकारी एजेंसियों द्वारा दिए जाने वाले सड़क सुधार और बीओटी के अन्य ठेकों की भी विभाग जानकारी जुटा रहा है। साथ ही कई सरकारी विभागों को सेवाकर वसूली के नोटिस भेजे गए हैं।
जवाहरलाल नेहरू शहरी नवीनीकरण मिशन के तहत राजधानी की नर्मदा जलप्रदाय परियोजना की पाइप लाइन बिछाने और फिल्टर प्लांट व पंप हाउस निर्माण सहित अन्य कार्यो के लिए 273 करोड़ रुपए के कार्यादेश जारी हो गए हैं। सूत्रों के अनुसार नर्मदा परियोजना के तहत जारी कार्यादेश वर्क कांट्रेक्ट की श्रेणी में आता है। वर्क कांट्रेक्ट पर चार प्रतिशत कर लगता है। इस हिसाब से कुल दस करोड़ 92 लाख रुपए सेवाकर देना होगा।
बीओटी की जानकारी
पीडब्ल्यूडी द्वारा बीओटी आधार पर दिए जाने वाले सड़क निर्माण व रखरखाव के ठेकों में से रखरखाव की राशि पर भी सेवाकर लगता है, लेकिन अब तक विभाग को यह कर नहीं मिला है। विभाग ने सभी बीओटी और सड़क रखरखाव के अन्य ठेकों की जानकारी मांगी है।
सिटीलिंक को नोटिस
स्टार बस का संचालन कर रही भोपाल सिटीलिंक लिमिटेड को भी सेवाकर का नोटिस भेजा गया है। स्टार बस पर लगे विज्ञापनों से हुई आय पर सेवाकर लगाया गया है। विभाग के अधिकारियों के अनुसार भोपाल सिटीलिंक लिमिटेड ने अब तक विज्ञापनों से हुई आय की जानकारी नहीं भेजी है। इसके अलावा विभाग ने रेलवे को भी होर्डिग से हुई आय पर सात लाख रुपए सेवाकर और इतनी ही पेनाल्टी आरोपित की है। लघु उद्योग निगम द्वारा एक इंजीनियरिंग कंसल्टेंट की सेवाएं लेने पर उन्हें 70 लाख रुपए सेवा कर और इतना ही जुर्माना लगाया गया है।
भेल में सुरक्षा व्यवस्था का जिम्मा संभालने वाली एजेंसी केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) को भी एक करोड़ रुपए के सेवाकर का नोटिस दिया गया है। विभाग विद्युत मंडल को भी 65 करोड़ रुपए का सेवाकर जमा करने का नोटिस थमा चुका है।
कोट
सेवाकर नियमों के तहत सरकारी विभागों को भी संबंधित सेवाओं के लिए कर जमा करना जरूरी है।
- दीपक बाहेती, पूर्व अध्यक्ष, आईसीएआई (भोपाल चेप्टर)