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राज्यपाल नहीं कर सकेगें रजिस्ट्रार की नियुक्ति

भोपाल.uniदो जनवरी को जारी आदेश में कुलसचिव, परीक्षा और वित्त नियंत्रक पदों पर नियुक्ति का अधिकार राज्यपाल को दिया गया था। सरकार ने अब यह अधिकार फिर राज्य शासन को दे दिया है।

विश्वविद्यालयों की सत्ता को लेकर राजभवन और सरकार के बीच रस्साकशी थमती नजर नहीं आ रही है। राज्य सरकार ने प्रदेश के विश्वविद्यालयों में रजिस्ट्रार, परीक्षा नियंत्रक और वित्त नियंत्रक की नियुक्ति का अधिकार राज्यपाल को देने के दो माह बाद ही इसे वापस ले लिया है।

राज्य सरकार ने दो जनवरी को मप्र विश्वविद्यालय सेवा नियम,१९८३ में संशोधन कर विश्वविद्यालयों में कुलसचिव (रजिस्ट्रार ) के आठ पद, परीक्षा नियंत्रक और वित्त नियंत्रक के सात-सात पद निर्मित कर उन पर नियुक्ति के अधिकार राज्यपाल को दे दिए थे। यह कार्यवाही तत्कालीन उच्च शिक्षा मंत्री लक्ष्मण सिंह गौड़ के समय हुई थी।

इस संशोधन का भाजपा नेताओं व कार्यकर्ताओं ने विरोध किया था। नतीजन शिवराज सरकार ने ताजा आदेश में दो जनवरी के आदेश को निस्त कर अब नियुक्ति के अधिकार वापस राज्य शासन को दे दिए हैं। इससे अब रजिस्ट्रारों की नियुक्ति में कुलाधिपति एवं राज्यपाल के कार्यालय की भूमिका खत्म हो जाएगी। गौरतलब है कि कुलपतियों की नियुक्ति में कुलाधिपति की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। स्क्रीनिंग कमेटी नाम का पैनल तैयार करती है और राज्यपाल एक नाम का चयन करते हैं।

नए आदेश के बारे में उच्च शिक्षा विभाग के अफसरों का कहना है कि कि विवि अधिनियम और उसके तहत बने नियमों में नियुक्ति संबंधी अधिकार राज्य सरकार के पास ही थे और दो जनवरी को जारी आदेश में इस बात का ध्यान नहीं रखा गया था, इसीलिए अब नया आदेश जारी किया गया है।





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