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शिक्षण मोर्चे पर बेटियों का पलड़ा भारी

जयपुर.girlआने वाले समय में प्रदेश की महिलाएं अध्यापन के मोर्चे पर पुरुषों को पछाड़ देंगी। इस साल प्रदेश के विभिन्न बीएड कॉलेजों में प्रशिक्षण लेने वालों में 27,623 युवतियां और 21, 733 युवक हैं। शिक्षाविदों की नजर में यह तादाद प्रदेश की मौजूदा महिला साक्षरता दर (44.34 प्रतिशत) के हिसाब से चौंकाने वाली है। फिलहाल तीन लाख 76 हजार पुरुष शिक्षक और एक लाख 54 हजार महिला शिक्षक हैं।

प्रदेश की तीन करोड़ महिलाओं में से लगभग 1.30 करोड़ महिलाएं ही साक्षर हैं। शिक्षाविद् राजाराम भादू व राजस्थान विश्वविद्यालय की शिक्षा समाजशास्त्री अरुणा भार्गव का कहना है कि बेटियां स्कूलों में कम अनुपात में भर्ती होने के बावजूद लड़कों की तुलना में शिक्षा के प्रति ज्यादा गंभीर हैं। वैश्वीकरण ने युवतियों में कॅरिअर के प्रति दिलचस्पी पैदा की है। वे अब चूल्हे-चौके तक सीमित नहीं।

एमएड में महिलाओं को 20 फीसदी आरक्षण

एमएड कॉलेजों में इस बार 20 फीसदी सीटें महिला अभ्यर्थियों के लिए आरक्षित होंगी। शेष सीटों पर सामान्य कोटे से प्रवेश होंगे, जिसमें महिला और पुरुष अभ्यर्थियों को मेरिट पर प्रवेश दिए जाएंगे। एमएड प्रवेश परीक्षा का आयोजन लगातार दूसरे वर्ष राजस्थान विश्वविद्यालय के जिम्मे है। परीक्षा के समन्वयक एम. पारीक ने बताया कि प्रदेश के एमएड कॉलेजों में करीब 750 सीटों पर प्रवेश दिए जाएंगे। इनमें 20 फीसदी सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी।

प्री-एमएड परीक्षा के फॉर्म की बिक्री शुरू हो चुकी है। अब तक 10 हजार परीक्षा फार्र्मो की बिक्री हो चुकी है। अंतिम तिथि 12 अप्रैल है। परीक्षा 25 मई को सभी संभागीय मुख्यालयों पर होगी। प्री-एमएड परीक्षा के लिए बीएड विद्यार्थी भी योग्य होंगे।

प्रवेश से पहले उन्हें बीएड डिग्री का सर्टिफिकेट देना होगा। अनुसूचित जाति, जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, विधवा और परित्यक्ता वर्ग के अभ्यर्थियों को न्यूनतम अंकों में 5 प्रतिशत की छूट दी गई है। अब वे बीएड में 50 प्रतिशत अंक होने पर एमएड में प्रवेश के योग्य होंगे।





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